तमिलनाडु में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर, पीक आवर्स के लिए 3,000 मेगावाट की अतिरिक्त खरीद होगी
अक्टूबर में पड़ रही बेमौसम गर्मी और हवा से बिजली उत्पादन में कमी के कारण तमिलनाडु बिजली संकट का सामना कर रहा है। शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में मांग 20,000 मेगावाट के करीब पहुंच गई है, जिससे…
अक्टूबर में पड़ रही बेमौसम गर्मी और हवा से बिजली उत्पादन में कमी के कारण तमिलनाडु बिजली संकट का सामना कर रहा है। शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में मांग 20,000 मेगावाट के करीब पहुंच गई है, जिससे निपटने के लिए राज्य की बिजली वितरण कंपनी ने 3,000 मेगावाट तक की अतिरिक्त बिजली खरीदने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खरीद के लिए एक तत्काल निविदा (urgent tender) जारी की गई है।
यह खरीद 12 से 31 अक्टूबर की अवधि के लिए की जाएगी। शाम 6 बजे से आधी रात के बीच सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत को पूरा करने के अलावा, आधी रात से सुबह 2 बजे के बीच 1,500 मेगावाट तक बिजली खरीदने की भी योजना है।
क्यों पड़ी अतिरिक्त बिजली की जरूरत?
टीएनपीडीसीएल (तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सितंबर से ही गर्मी का लंबा खिंचना और अल नीनो के प्रभाव से बिजली की खपत असामान्य रूप से बढ़ी हुई है। इसके साथ ही, हवा से बिजली उत्पादन में गिरावट और केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों से आपूर्ति में कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मलकुमार के अनुसार, पिछले साल की तुलना में पीक आवर की मांग 3,000 मेगावाट बढ़ गई है, जबकि केंद्रीय पूल से मिलने वाली 3,000 मेगावाट बिजली भी उपलब्ध नहीं थी।
दिलचस्प है कि दिन के समय सौर ऊर्जा के मजबूत उत्पादन से राज्य में बिजली अतिरिक्त (सरप्लस) रहती है, लेकिन शाम होते ही कमी होने लगती है। मंगलवार को राज्य में बिजली की कुल खपत 432.6 मिलियन यूनिट रही, जबकि पीक डिमांड 19,921 मेगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले साल के रिकॉर्ड के करीब है।
कैसे पूरी होगी मांग?
जारी की गई निविदा केंद्र सरकार के 'डिस्कवरी ऑफ एफिशिएंट इलेक्ट्रिसिटी प्राइस' (DEEP) पोर्टल के माध्यम से है, जिसमें राज्य के अंदर और बाहर के निजी उत्पादकों से आपूर्ति के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अनुबंध तय होने के बाद कीमतें निर्धारित की जाएंगी।
राज्य पहले से ही शॉर्ट-टर्म खरीद और पावर स्वैप व्यवस्था के जरिए 3,000 मेगावाट बिजली ले रहा है। साथ ही, पावर एक्सचेंज से भी इतनी ही मात्रा में बिजली खरीदी जा रही है। मंत्री निर्मलकुमार ने बताया कि तमिलनाडु ओपन मार्केट से 4,500 मेगावाट बिजली पहले ही खरीद चुका है और जरूरत पड़ने पर और भी व्यवस्था की जाएगी।
अधिकारियों को उम्मीद है कि अगर 20 अक्टूबर तक उत्तर-पूर्वी मानसून आ जाता है, तो मांग में कमी आ सकती है। हालांकि, मानसून कमजोर रहने पर नवंबर में और भी बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
इनपुट: IANS



