तमिलनाडु-पुडुचेरी उपचुनाव: मतदाताओं में भारी उत्साह, तीन विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न
तमिलनाडु की दो और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मंगलवार शाम 6 बजे मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिन भर मतदाताओं ने भारी उत्साह…
तमिलनाडु की दो और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मंगलवार शाम 6 बजे मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिन भर मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया, जिसके चलते मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहने की उम्मीद है। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी।
तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम के अलावा पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट पर यह उपचुनाव हुआ। चुनाव आयोग द्वारा दोपहर 3 बजे तक जारी शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, मदुरंतकम में 83.86% और धारापुरम में 78.53% मतदान दर्ज किया गया था। वहीं, पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट पर शाम 5 बजे तक 78.83% वोट पड़ चुके थे। अधिकारियों का अनुमान है कि अंतिम आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं।
तमिलनाडु में क्यों हुए चुनाव?
ये उपचुनाव मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके सरकार के लिए पहली चुनावी परीक्षा माने जा रहे हैं, जो इसी साल मई में सत्ता में आई है। मदुरंतकम और धारापुरम सीटें तब खाली हुई थीं, जब तत्कालीन AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा ने इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थाम लिया था। टीवीके ने दोनों को उन्हीं सीटों से दोबारा उम्मीदवार बनाया है। इन सीटों पर टीवीके, डीएमके, एआईएडीएमके, वामपंथी दलों और नाम तमिलर काची के बीच मुकाबला है, जबकि पीएमके ने खुद को चुनाव से अलग रखा। मदुरंतकम में 27 और धारापुरम में 22 उम्मीदवार मैदान में हैं।
पुडुचेरी का सियासी समीकरण
पुडुचेरी में यह उपचुनाव मुख्यमंत्री एन. रंगासामी की चार महीने पुरानी एनडीए सरकार की लोकप्रियता का लिटमस टेस्ट है। रंगासामी ने अप्रैल में हुए चुनाव में थट्टानचावड़ी और मंगलम, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने थट्टानचावड़ी सीट खाली कर दी थी। यहां एआईएनआरसी के अशोक आनंद का मुकाबला कांग्रेस के ई. विनायगम और डीएमके के के. सेधु सेल्वम से है।
मतदान के दौरान कुछ मामूली बाधाएं
हालांकि मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ जगहों पर मामूली दिक्कतें भी सामने आईं। मदुरंतकम के थंदराई में, डीएमके एजेंटों ने आरोप लगाया कि ईवीएम पर एक उम्मीदवार के चुनाव चिह्न के पास अमिट स्याही का निशान मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है, जिसके बाद कुछ देर के लिए वोटिंग रोकनी पड़ी। अधिकारियों ने जांच के बाद मतदान दोबारा शुरू कराया। कुछ बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट कनेक्शन में आई तकनीकी खराबी के कारण भी मॉक पोल में देरी हुई, जिसे इंजीनियरों ने ठीक कर दिया। सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को भी तैनात किया गया था।
इनपुट: IANS



