दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर सख्ती: 1 नवंबर से शीतकालीन कार्य योजना लागू, जानें क्या-क्या बदलेगा
सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कमर कस ली है। केंद्रीय…
सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कमर कस ली है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली समेत NCR में शामिल चार राज्यों को प्रदूषण रोकने के उपायों को और सख्त करने के निर्देश जारी किए हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कवायद का हिस्सा राजस्थान का अलवर जिला भी है, जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु गुणवत्ता में गिरावट थामने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे NCR में 1 नवंबर से शीतकालीन कार्य योजना (Winter Action Plan) लागू कर दी जाएगी, जिसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को खतरनाक होने से रोकना है।
प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
आगामी सर्दियों के लिए लागू की जा रही श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के तहत कई कड़े नियम अमल में लाए जाएंगे। इनमें सड़कों की मैकेनिकल सफाई और नियमित रूप से पानी का छिड़काव शामिल है, ताकि धूल को उड़ने से रोका जा सके। साथ ही, 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने और खुले में कूड़ा, अपशिष्ट या सूखे पत्ते जलाने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। होटल और ढाबों में कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी होगी।
वाहनों और निर्माण कार्यों पर नियम
प्रदूषण में बड़ा योगदान देने वाले वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
- डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध: पारंपरिक डीजल जेनरेटर सेट पर रोक रहेगी। औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सीएनजी, एलपीजी या अन्य स्वच्छ ईंधन वाले जेनरेटर का उपयोग करना होगा।
- वाहनों पर सख्ती: दिल्ली में 1 नवंबर से उन निजी और व्यावसायिक पेट्रोल-डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगेगा जो BS-VI उत्सर्जन मानक पूरे नहीं करते। साथ ही, पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए वैध प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य होगा।
- निर्माण कार्यों पर नियंत्रण: सभी निर्माण और विध्वंस गतिविधियों को प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत रेगुलेट किया जाएगा। जिन साइट्स पर धूल रोकने के उपाय, जैसे कि ग्रीन नेट लगाना, नहीं पाए जाएंगे, उन पर कार्रवाई होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्ते अलवर सहित पूरे NCR क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। तापमान में गिरावट के साथ हवा पर दबाव बढ़ेगा, और इन उपायों का समय पर और सख्ती से कार्यान्वयन ही यह तय करेगा कि क्षेत्र की हवा कितनी साफ रहती है।
इनपुट: IANS



