मनीष तिवारी का भाजपा पर तंज: सत्ता में बैठे लोग 'लोकतंत्र बचाने' के लिए रैली क्यों कर रहे हैं?
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को एक 'अजीब विडंबना' करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता में बैठी पार्टी को रैली…
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को एक 'अजीब विडंबना' करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता में बैठी पार्टी को रैली करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, जबकि आमतौर पर विपक्ष सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करता है।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में तिवारी ने कहा, "यह एक अजीब विडंबना है। आमतौर पर विपक्ष सरकार के गलत कामों के खिलाफ विरोध करता है, लेकिन यहां विपक्ष मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "यह भी अनोखी बात है कि सत्ता में बैठे लोग रैली कर रहे हैं। वे किस बात के लिए रैली कर रहे हैं? अगर आप संविधान को बचाना चाहते हैं, तो उन 13 करोड़ लोगों के मतदान के अधिकार बहाल करें, जिन्हें इनसे वंचित रखा गया है। ऐसा करने से संविधान की रक्षा हो जाएगी।"
रैली और जवाबी रैली की राजनीति
मनीष तिवारी का यह बयान बुधवार को दिल्ली के चांदनी चौक में भाजपा द्वारा आयोजित एक पैदल मार्च के संदर्भ में आया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में हो रही यह 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पार्टी के एक बड़े जनसंपर्क अभियान का हिस्सा है। इस मार्च में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
भाजपा का यह राष्ट्रव्यापी अभियान विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली से ठीक पहले हो रहा है। विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली की घोषणा की है।
पंजाब की कानून-व्यवस्था और नार्को-टेररिज्म
इस बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य दशकों से नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद यानी 'नार्को-टेररिज्म' की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है।
तिवारी ने कहा, "मैंने हमेशा यही कहा है और इस बारे में लिखा भी है कि पंजाब 1995 से ही नार्को-टेररिज्म के दौर से गुजर रहा है, जिस तरह 1980 से 1995 के बीच आतंकवाद का मुकाबला करके उसे खत्म किया गया था, उसी तरह आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए पंजाब को एकजुट होकर नार्को-टेररिज्म, यानी नशीले पदार्थों से प्रेरित आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा।"
इसी बीच, पंजाब सरकार ने बुधवार को कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अबोहर में 'जाखड़ ट्रस्ट' द्वारा आयोजित की जाने वाली सातवीं वार्षिक नशा-विरोधी मैराथन को अनुमति देने से इनकार कर दिया। भाजपा नेता सुनील जाखड़ के परिवार द्वारा संचालित यह ट्रस्ट 'नशों से दूर, खेलों की ओर' नारे के तहत सात वर्षों से यह आयोजन कर रहा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना है।
इनपुट: IANS



