सिद्धारमैया 'स्टिंग वीडियो' मामला: पुलिस ने यूट्यूब से मांगी आईपी एड्रेस की जानकारी
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो मामले में जांच तेज हो गई है। पुलिस ने अब इस मामले में वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब को पत्र लिखकर तकनीकी जानकारी मांगी है…
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो मामले में जांच तेज हो गई है। पुलिस ने अब इस मामले में वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब को पत्र लिखकर तकनीकी जानकारी मांगी है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने वीडियो अपलोड करने वाले के आईपी एड्रेस और उसकी पहचान से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा करने को कहा है।
यह मामला कर्नाटक में एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसमें केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और राज्य की कांग्रेस सरकार के बीच सीधी तकरार देखने को मिल रही है। कुमारस्वामी ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे पर तीखे हमले किए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन खरगे ने जोरदार खंडन करते हुए कहा है कि जरूरत पड़ने पर कुमारस्वामी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इसके जवाब में कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय में विरोध प्रदर्शन भी किया।
जांच के तीन मुख्य पहलू
साइबर क्राइम पुलिस इस वायरल वीडियो की कई एंगल से जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर केंद्रित है। पहले चरण में, पुलिस यूट्यूब से तकनीकी डेटा हासिल कर रही है ताकि वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति तक पहुंचा जा सके। दूसरे चरण में, वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि वीडियो असली है या उसमें कोई छेड़छाड़ की गई है। इसके अलावा, वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वालों की पहचान के प्रयास भी जारी हैं। तीसरे पहलू के तहत, पुलिस इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे के मकसद का पता लगा रही है।
निजी मीडिया संस्थान का दावा
इस बीच, कर्नाटक के एक निजी मीडिया संस्थान के प्रमुख ने दावा किया है कि यह स्टिंग वीडियो उन्होंने ही बनाया था। उनका कहना है कि इस संबंध में सारी जानकारी उन्होंने जांच अधिकारियों को सौंप दी है। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी जानकारी मिलने के बाद मामले की कड़ियां जुड़ेंगी और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सकेगी।
इनपुट: IANS



