कोरियाई प्रायद्वीप: दक्षिण कोरिया ने टकराव के बजाय संवाद और सैन्य क्षमता पर ज़ोर दिया
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनका देश उत्तर कोरिया के साथ टकराव नहीं, बल्कि संवाद के ज़रिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की राह पर आगे बढ़ेगा। समाचार एजेंसी IANS…
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनका देश उत्तर कोरिया के साथ टकराव नहीं, बल्कि संवाद के ज़रिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की राह पर आगे बढ़ेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह संवाद एक मज़बूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर किया जाएगा ताकि कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
यह टिप्पणी राष्ट्रपति ली ने सोल डिफेंस डायलॉग (SDD) के उद्घाटन समारोह में अपने एक वीडियो संदेश के ज़रिए की। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया अपनी स्वतंत्र रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करते हुए आपसी सम्मान और सहयोग के आधार पर शांति और समृद्धि के लिए संवाद का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
शांति की राह में चुनौतियाँ
राष्ट्रपति ली ने मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल को "बेहद जटिल" बताते हुए दुनिया के कई हिस्सों में जारी टकरावों और सशस्त्र संघर्षों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि दशकों से अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को सहारा देने वाली परमाणु अप्रसार की वैश्विक व्यवस्था कमज़ोर पड़ रही है।
तकनीकी ख़तरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तेज़ी से विकसित हो रही तकनीकें भी नए और अप्रत्याशित सुरक्षा ख़तरे पैदा कर रही हैं। ऐसे ख़तरों से निपटने के लिए किसी एक देश की क्षमता पर्याप्त नहीं होगी।" इसके समाधान के लिए उन्होंने एक ऐसे नए सुरक्षा सहयोग मॉडल की वकालत की जो मज़बूत प्रतिरोधक क्षमता, अंतरराष्ट्रीय नियमों और साझा लचीलेपन पर आधारित हो।
कूटनीति और सैन्य तैयारी
ली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दक्षिण कोरिया, अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है। इसी क्रम में, दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक ने भी उम्मीद जताई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच संवाद फिर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरियाई सेना इस कूटनीतिक प्रयास को अपनी मज़बूत सैन्य क्षमता के साथ पूरा समर्थन देगी।
तकनीकी रूप से, दोनों कोरियाई देश आज भी युद्ध की स्थिति में हैं, क्योंकि 1950-53 का कोरियाई युद्ध शांति संधि के बजाय केवल एक युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ था।
राष्ट्रपति ली का शांति संकल्प
राष्ट्रपति ली हाल के महीनों में लगातार शांति स्थापना पर ज़ोर देते रहे हैं। 15 अगस्त को 'लिबरेशन डे' पर अपने भाषण में, उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि दोनों कोरियाई देश युद्ध को समाप्त करने और प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर बातचीत करें। इससे पहले 2 सितंबर को भी उन्होंने कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति व्यवस्था स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहराया था और उत्तर कोरिया व अमेरिका के बीच बातचीत शुरू कराने में मदद का वादा किया था।
उन्होंने कहा था, "हमें संघर्ष और टकराव पर आधारित युद्धविराम की जगह सहयोग और समृद्धि पर आधारित शांति व्यवस्था लानी चाहिए।" राष्ट्रपति के अनुसार, दोनों कोरियाई देश अनावश्यक टकराव में अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, जो एक "दुर्भाग्यपूर्ण" और "दुखद" सच्चाई है जिसे बदलना ज़रूरी है।
इनपुट: IANS



