सिरसा ग्रेनेड हमला: NIA ने 4 और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया, विदेशी साजिश का खुलासा
हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के पास हुए ग्रेनेड हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए ने इस…
हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के पास हुए ग्रेनेड हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए ने इस मामले में चार और आरोपियों के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में एक पूरक आरोप-पत्र (supplementary chargesheet) दाखिल किया है।
यह कार्रवाई 25 नवंबर 2025 को हुए उस हमले से जुड़ी है, जिसका मकसद पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना और आम लोगों में डर पैदा करना था। एनआईए ने बताया कि शनिवार को दाखिल किए गए इस आरोप-पत्र में राजबीर सिंह उर्फ फौजी, वेद प्रकाश उर्फ पम्मा, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और चिराग ठकराल को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने साजिश में इन चारों की अलग-अलग भूमिकाओं का विस्तृत ब्योरा दिया है।
विदेशों में बैठे हैंडलरों से जुड़े तार
एनआईए की जांच में सामने आया है कि यह हमला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसे शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्यों ने अंजाम दिया था। इस नेटवर्क के तार सीमा पार बैठे उन हैंडलरों से जुड़े हैं जो भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
एजेंसी के अनुसार, आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी एक कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम कर रहा था। वह भारत में हथियार, हैंड ग्रेनेड और नशीले पदार्थों को जमा करने और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में था। वहीं, चिराग ठकराल, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल और वेद प्रकाश ने राजबीर के निर्देशों पर काम करते हुए हमले में इस्तेमाल हुए विस्फोटकों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई
यह मामला मूल रूप से 26 नवंबर 2025 को सिरसा के सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जिसे बाद में 30 दिसंबर 2025 को एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया। इससे पहले इसी साल 24 मई को एनआईए ने नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था, जिनमें दो पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच भी शामिल थे।
नए आरोप-पत्र में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता-2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम-1908 और यूए(पी) अधिनियम-1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। एनआईए का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है ताकि इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर पूरे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
इनपुट: IANS



