मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए 'फॉर्म-7' के दुरुपयोग पर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

कर्नाटक में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने चेतावनी दी है कि जो लोग पात्र मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए 'फॉर्म-7' का गल…

कर्नाटक: वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए 'फॉर्म-7' के दुरुपयोग पर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
(फोटो: IANS)

कर्नाटक में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने चेतावनी दी है कि जो लोग पात्र मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए 'फॉर्म-7' का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस मामले पर सरकार का कड़ा रुख साफ किया।

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खड़गे ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि बड़ी संख्या में पहले से छपे हुए फॉर्म-7 कैसे हासिल किए जा रहे हैं और जमा कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर आप फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल करते हैं, अगर आप जिंदा लोगों को मृत और यहां रहने वाले लोगों को गैर-निवासी बताते हैं, तो क्या हमें आपको सम्मानित करना चाहिए?"

भाजपा पर सीधा निशाना

गृह मंत्री ने सीधे तौर पर भाजपा पदाधिकारियों पर चुनावी कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया, "अगर आप कानून का पालन नहीं कर रहे हैं, तो मैं आपको सिखाऊंगा कि इसका पालन कैसे किया जाता है।" प्रियांक खड़गे ने जोर देकर कहा कि यह कर्नाटक है, गुजरात, दिल्ली या यूपी नहीं, और यहां संविधान का उल्लंघन करने वालों को परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि जो भी कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

जांच और शिकायतों का दौर

खड़गे ने बताया कि पूर्व विधायकों और भाजपा कार्यकर्ताओं सहित कई लोगों के खिलाफ जनता को परेशान करने के आरोप में मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में, लोगों ने बाद में अधिकारियों से संपर्क कर यह कहते हुए अपने फॉर्म-7 आवेदन वापस लेने की मांग की कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए विशेष रूप से मुस्लिम, ईसाई और दलित समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।

SIR या 'संघ इंटेंसिव रिवीजन'?

प्रियांक खड़गे ने मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) पर तंज कसते हुए पूछा, "अगर वे खुद चुनाव आयोग का काम कर रहे हैं, तो एसआईआर किसलिए था? यह तो 'संघ इंटेंसिव रिवीजन' बन गया है, है ना?" उन्होंने भाजपा से यह स्पष्ट करने की मांग की कि उन्हें पहले से छपे हुए फॉर्म कैसे मिले और वे जीवित लोगों को मृत क्यों बता रहे हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक सवाल के जवाब में, खड़गे ने कहा कि यह एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन आरोप लगाया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ने "अपनी आत्मा भाजपा को बेच दी है।" उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह 'सनातन' के खिलाफ नहीं हैं और हिंदू धर्म तथा हिंदुत्व में बड़ा अंतर है, क्योंकि हिंदू धर्म हजारों साल पुराना है जबकि आरएसएस लगभग एक सदी पुराना संगठन है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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