कर्नाटक मतदाता सूची विवाद: CM शिवकुमार का आरोप – BJP-JDS ने एक लाख से ज़्यादा आपत्ति-फ़ॉर्म जलाए
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ताओं पर एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक आपराधिक साज़िश के तहत मतदाता सूची से नाम…
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ताओं पर एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक आपराधिक साज़िश के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले एक लाख से ज़्यादा 'फ़ॉर्म-7' आवेदन ज़बरदस्ती वापस लेकर जला दिए गए।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने इसे चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में हेरफेर करने की एक बड़ी कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि जब इस मामले में FIR दर्ज हुई, तो दोनों विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को धमकाकर ये फ़ॉर्म छीन लिए।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में फ़ॉर्म-7 जमा किए जाने से जुड़ा है। ये फ़ॉर्म किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति जताने या उसे सूची से हटाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और जेडीएस कार्यकर्ताओं को 500 से 3,000 फ़ॉर्म-7 दिए गए थे।
शिवकुमार ने कई गंभीर आरोप लगाए:
- फ़ॉर्म जलाना: उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग में शिकायत के बाद कार्यकर्ताओं ने BLO के पास जाकर जमा किए गए एक लाख से ज़्यादा फ़ॉर्म वापस ले लिए और उन्हें जला दिया।
- फ़र्ज़ी जानकारी: कुछ आवेदनों में जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था।
- अधूरी जानकारी: कई लोगों को यह पता ही नहीं था कि वे किस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात की जाँच की मांग की है कि कार्यकर्ताओं को इतनी बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए फ़ॉर्म और मतदाताओं का निजी डेटा कहाँ से मिला।
चुनाव आयोग का पक्ष
इस विवाद पर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) वी. अंबुकुमार ने स्पष्ट किया है कि फ़ॉर्म-7 के आधार पर अब तक किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है। उन्होंने कहा कि आपत्ति दर्ज होने का मतलब नाम काटना नहीं है। संबंधित चुनाव पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी करने, सुनवाई करने और दस्तावेज़ों की जाँच के बाद ही कोई फ़ैसला लेंगे। 4 अक्टूबर तक राज्य में 91,278 फ़ॉर्म-7 आवेदन प्राप्त हुए थे।
सरकार और विपक्ष का टकराव
इससे पहले शिवकुमार ने मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भी किया था। इसके बाद CEO ने अधिकारियों को जानबूझकर ग़लत जानकारी देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम नहीं चाहते कि कोई भी मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रहे। सरकार सभी मतदाताओं की सुरक्षा करेगी, चाहे उनकी राजनीतिक पसंद कुछ भी हो।" उन्होंने विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए पुराने 'चिलुमे' विवाद का भी ज़िक्र किया।
वहीं, भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में फ़ॉर्म-7 जमा करना प्रतिबंधित नहीं है और उनका सत्यापन करना चुनाव अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है।
इनपुट: IANS



