संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर 42 पूर्व जजों ने जताई चिंता, लिखा खुला पत्र
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने एक खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कथित तौर पर कमजोर करने के अभियान पर गहरी चिंता व्यक्त की है…
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने एक खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कथित तौर पर कमजोर करने के अभियान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस पत्र में कहा गया है कि बिना ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने और संस्थाओं को बार-बार 'चोर' या 'समझौता किया हुआ' बताने से लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमज़ोर हो सकता है।
गुरुवार को जारी इस पत्र में पूर्व न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना सही नहीं है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि "विश्वास लोकतंत्र की मुद्रा है" और चुनावों को अवैध बताने के प्रयास अशांति को बढ़ावा दे सकते हैं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता
पूर्व न्यायाधीशों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का भी बचाव किया। उन्होंने इसे मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सटीक बनाए रखने के लिए एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया बताया। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और पंकज मित्तल भी शामिल हैं।
इनके अलावा, तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी इस पत्र पर अपनी सहमति जताई है, जिनमें जम्मू-कश्मीर और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.सी. पटेल, कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुभ्रो कमल मुखर्जी और सिक्किम हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश परमोद कोहली शामिल हैं। कई अन्य हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वैधानिक निकायों के पूर्व सदस्य भी हस्ताक्षरकर्ताओं में हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आरोप-प्रत्यारोप
यह पत्र उस समय सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तकरार चल रही है। इंडिया गठबंधन के सांसद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसका नेतृत्व बुधवार को राहुल गांधी ने किया था। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
इस विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में साहस है तो उसे उन सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए जहां वह निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए चुनावों में जीता है। नबीन ने आरोप लगाया कि विपक्ष लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहा है और राहुल गांधी उन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं जिन्हें वह घुसपैठिया मानते हैं।
इनपुट: IANS



