सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला: केरल हाईकोर्ट ने विजयन और अन्य के खिलाफ FIR का दिया आदेश
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) नेता पिनाराई विजयन से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की…
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) नेता पिनाराई विजयन से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सिफारिशों के आधार पर तत्काल एक एफआईआर दर्ज कर पूरी जांच करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद अब विजयन, उनकी बेटी वीना, दामाद और विधायक पीए मोहम्मद रियास समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह पूरा मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) और वीना से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन से संबंधित है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि ईडी द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों को देखते हुए किसी और प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि और ईडी की भूमिका
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच के दौरान पाया कि इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी अपराध के संकेत मिलते हैं। इसी के आधार पर ईडी ने 7 सितंबर को अपनी रिपोर्ट राज्य पुलिस प्रमुख को भेजी थी, जिसमें एक अलग मामला दर्ज कर जांच का अनुरोध किया गया था। हालांकि, राज्य सरकार ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय क्राइम ब्रांच की एक विशेष जांच टीम (SIT) से प्रारंभिक जांच का आदेश दे दिया था।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
राज्य सरकार की इस देरी के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता के.एम. शाहजहां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने दलील दी कि सिर्फ डायरी की एंट्री के आधार पर भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनाया जा सकता। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या जांच में दर्ज किए गए बयान सबूत के तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। ईडी ने भी अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच के लिए निर्धारित समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है, इसलिए एक और जांच का कोई औचित्य नहीं है।
राजनीतिक मायने और भविष्य के कदम
अदालत का यह फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि अब केरल के सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य आपराधिक जांच के दायरे में आ गए हैं। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का मतलब दोषसिद्धि नहीं है और आरोपों की अभी पूरी जांच होनी है। सीपीआई(एम) ने कहा है कि वह इस मामले से कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर निपटेगी। अब यह देखना होगा कि क्या पिनाराई विजयन, राज्य सरकार या कोई अन्य पक्ष इस फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती देता है या नहीं।
इनपुट: IANS



