केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मिल्मा तिरुवनंतपुरम यूनियन का भंग निदेशक मंडल बहाल
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक अहम फैसले को पलटते हुए 'मिल्मा तिरुवनंतपुरम रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन' (TRCMPU) के निदेशक मंडल को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने सतीशन…
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक अहम फैसले को पलटते हुए 'मिल्मा तिरुवनंतपुरम रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन' (TRCMPU) के निदेशक मंडल को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने सतीशन सरकार द्वारा 25 जुलाई को बोर्ड भंग करने के आदेश को अवैध करार दिया है। इस फैसले को सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायमूर्ति डॉ. एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति ए.के. प्रीथा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने यूनियन के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की अपील को स्वीकार कर लिया, जिन्होंने एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। इससे पहले, एक एकल न्यायाधीश ने सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
अनियमितताओं के आरोप और बोर्ड का निलंबन
राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए यूनियन के निर्वाचित बोर्ड को भंग कर दिया था और उसकी जगह एक प्रशासनिक समिति नियुक्त कर दी थी। इन आरोपों में सबरीमाला मंदिर को घी की आपूर्ति से जुड़ी गड़बड़ियां भी शामिल थीं। हालांकि, अब खंडपीठ के आदेश के बाद निर्वाचित बोर्ड को फिर से बहाल करना होगा।
मिल्मा ने दी थी आरोपों पर सफाई
इस मामले में केरल को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (मिल्मा) ने 3 अगस्त को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा था। मिल्मा के चेयरमैन के.एस. मणि ने कहा था कि सबरीमाला को घी की आपूर्ति में कोई चूक नहीं हुई थी और केवल तय मानकों को पूरा करने वाला प्रीमियम गुणवत्ता का घी ही भेजा गया था।
मणि ने जोर देकर कहा था कि फेडरेशन अपने उत्पादों की गुणवत्ता या शुद्धता से कभी समझौता नहीं करता। उन्होंने बताया था कि घी को भेजने से पहले उसकी कड़ी गुणवत्ता जांच की गई थी और उसे पूरी तरह से सील किए गए 15 किलोग्राम के टिन में पैक किया गया था, ताकि रास्ते में कोई छेड़छाड़ न हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देवस्वोम अधिकारियों से गुणवत्ता को लेकर कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली और आपूर्ति का पूरा भुगतान भी प्राप्त हो चुका है। मणि ने कहा था कि अगर डिलीवरी के बाद मिल्मा के घी की जगह घटिया उत्पाद रखे जाते हैं, तो यह एक गंभीर अपराध है और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



