शेयर बाज़ार में 8 हफ़्तों से लगातार गिरावट, क्या अब मिलेगी राहत? एक्सपर्ट्स ने बताया सपोर्ट और टारगेट लेवल
भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर…
भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार पर भारी दबाव बनाया है। बीते हफ्ते सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटा, जबकि निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को सेंसेक्स 570.59 अंक (0.79%) गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक (0.88%) गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।
बाजार में इस लगातार कमजोरी के बावजूद, कुछ तकनीकी संकेतक एक संभावित राहत की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही बाजार की व्यापक संरचना कमजोर बनी हुई है, लेकिन ओवरसोल्ड संकेतों और महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के करीब पहुंचने के कारण निकट भविष्य में एक उछाल (रिलीफ रैली) देखने को मिल सकता है।
बाजार के लिए अहम तकनीकी स्तर
विश्लेषकों के अनुसार, सेंसेक्स इस समय अपने प्रमुख मूविंग एवरेज (50-दिवसीय EMA 75,544.56 और 200-दिवसीय EMA 77,684.60) से काफी नीचे कारोबार कर रहा है, जो कमजोरी का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, उनके मुताबिक 71,000 से 71,200 का स्तर सेंसेक्स के लिए एक मजबूत सपोर्ट ज़ोन है। अगर बाजार इस स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहता है, तो एक रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, ऊपर की ओर 72,300 से 72,500 का दायरा एक बड़ी बाधा (रेजिस्टेंस) का काम करेगा।
निफ्टी के लिए क्या हैं लक्ष्य?
बाजार विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए भी महत्वपूर्ण स्तर बताए हैं। उनके अनुसार, अगर बाजार में सुधार होता है तो निफ्टी के लिए पहला लक्ष्य 22,800 का स्तर हो सकता है। इसके बाद 23,100 से 23,200 का स्तर अगला संभावित टारगेट रहेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि निफ्टी अप्रैल के अपने निचले स्तरों से भी नीचे फिसल जाता है, तो रिकवरी की संभावना कमजोर पड़ जाएगी। ऐसी स्थिति में सूचकांक 21,700 से 22,000 के दायरे तक भी गिर सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
मौजूदा अस्थिर माहौल को देखते हुए विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने और हेज्ड रणनीति (जोखिम कम करने वाली रणनीति) अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड्स और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। अगर विदेशी बिकवाली थमती है और तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है, अन्यथा अनिश्चितता बनी रह सकती है।
इनपुट: IANS



