बिना लाइसेंस के दे रहे थे निवेश की सलाह, SEBI का बड़ा आदेश — ₹546 करोड़ लौटाए अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी
शेयर बाज़ार में निवेश की सलाह देने वाली एक कंपनी पर बाज़ार नियामक सेबी (SEBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (एएसटीपीएल) और इसके संस्थापक अवधूत साठे को आदेश दिया गया…
शेयर बाज़ार में निवेश की सलाह देने वाली एक कंपनी पर बाज़ार नियामक सेबी (SEBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (एएसटीपीएल) और इसके संस्थापक अवधूत साठे को आदेश दिया गया है कि वे निवेशकों से जुटाई गई 546.17 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि वापस करें। सेबी ने पाया कि यह कंपनी बिना ज़रूरी लाइसेंस या पंजीकरण के ही निवेशकों को सलाहकार सेवाएं दे रही थी।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कंपनी और उसके संस्थापक पर कुल 11.5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई सेबी की विस्तृत जांच के बाद हुई है, जिसमें यह सामने आया कि एएसटीपीएल महज़ शेयर बाज़ार की शिक्षा देने की आड़ में निवेशकों को विशिष्ट शेयरों में खरीद-बिक्री की सलाह दे रही थी।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
सेबी की जांच में यह बात सामने आई कि एकेडमी कथित तौर पर शेयरों में एंट्री और एग्ज़िट लेवल, स्टॉप लॉस और कीमतों की दिशा से जुड़े सुझाव दे रही थी। इस तरह की सलाह देने के लिए सेबी से निवेश सलाहकार (Investment Advisor) या रिसर्च एनालिस्ट (Research Analyst) के तौर पर पंजीकृत होना अनिवार्य है, जो कंपनी के पास नहीं था। नियामक ने यह भी पाया कि कंपनी अपनी प्रचार सामग्री में सिर्फ़ चुनिंदा मुनाफ़े वाले सौदों को दिखाकर और ऊंचे रिटर्न का दावा कर प्रतिभागियों को आकर्षित कर रही थी। मार्च 2024 में एक प्रशासनिक चेतावनी के बावजूद इन गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं आया, जिसके बाद सेबी ने यह सख़्त कदम उठाया।
निवेशकों के पैसे लौटाने का पूरा प्लान
सेबी ने निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की है।
रिफंड और जुर्माना: एएसटीपीएल और अवधूत साठे को आदेश मिलने के पाँच महीने के भीतर पूरी 546.17 करोड़ रुपए की राशि एक विशेष बैंक खाते में जमा करनी होगी। इसके अलावा, कंपनी पर 6 करोड़, अवधूत साठे पर 4 करोड़ और गौरी साठे पर 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसे 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा। पूरी राशि जमा होने तक संबंधित पक्षों के बैंक खातों से डेबिट लेनदेन पर भी रोक लगा दी गई है।
सूचना और प्रक्रिया: कंपनी को 30 दिनों के भीतर अंग्रेजी, हिंदी और एक स्थानीय भाषा के अख़बार में विज्ञापन देकर निवेशकों को रिफंड प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। भुगतान सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर जैसे बैंकिंग माध्यमों से ही किया जाएगा ताकि लेनदेन का रिकॉर्ड रहे और सही लाभार्थी की पहचान हो सके।
बाज़ार से भी किया गया प्रतिबंधित
सेबी ने सख़्ती दिखाते हुए कंपनी और संस्थापक को प्रतिभूति बाज़ार से भी प्रतिबंधित कर दिया है। अवधूत साठे और उनकी कंपनी पर दो साल या रिफंड पूरा होने तक (जो भी अवधि ज़्यादा हो) के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, निदेशक के तौर पर अवधूत साठे को छह महीने के लिए बाज़ार से दूर रहने का आदेश दिया गया है।
इनपुट: IANS



