सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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SEBI की निवेशकों को चेतावनी: 'फिनफ्लुएंसर' और रातों-रात अमीर बनाने वाले वादों से रहें सावधान

शेयर बाजार में निवेश करने वालों की बढ़ती संख्या के बीच, बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 'फिनफ्लुएंसर' (सोशल…

SEBI की निवेशकों को चेतावनी: 'फिनफ्लुएंसर' और रातों-रात अमीर बनाने वाले वादों से रहें सावधान
(फोटो: IANS)

शेयर बाजार में निवेश करने वालों की बढ़ती संख्या के बीच, बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 'फिनफ्लुएंसर' (सोशल मीडिया पर वित्तीय सलाह देने वाले) और अप्रत्याशित यानी बहुत ज्यादा रिटर्न का लालच देने वालों से सतर्क रहने को कहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारतीय बाजार लगातार नई ऊंचाइयों पर है और निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

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पंजाब यूनिवर्सिटी में सेबी के 'प्रोजेक्ट जागरूक' के लॉन्च के मौके पर पांडे ने कहा कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा परिवार अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा पूंजी बाजार के इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "परिवार अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा सिक्योरिटीज मार्केट के इंस्ट्रूमेंट्स में भी लगा रहे हैं।"

बदलता भारतीय निवेश परिदृश्य

पिछले एक दशक में भारतीय पूंजी बाजार में आए बदलावों पर जोर देते हुए पांडे ने बताया कि भारत का बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) चार गुना बढ़कर लगभग 472 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी दौरान, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की संपत्ति भी 22 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 78 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। उन्होंने यह भी बताया कि रिटेल यानी आम निवेशकों के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश के सबसे सरल और लोकप्रिय तरीकों में से एक बनकर उभरा है।

नियामक ने उठाए कई सुधारवादी कदम

सेबी चेयरमैन के मुताबिक, बाजार के इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें म्यूचुअल फंड स्कीम्स की श्रेणियों को सरल बनाना, लागत पर सीमा तय करना और कम राशि वाली एसआईपी शुरू करना शामिल है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग निवेश कर सकें। पांडे ने बताया कि सेबी ने एक आसान FPI फ्रेमवर्क भी पेश किया, जिससे डिजिटल ऑनबोर्डिंग में मदद मिली और विदेशी निवेशकों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बेहतर हुआ।

नियामक ने इन्वेस्टमेंट एडवाइजर, ESG रेटिंग देने वाली कंपनियों और नए फाइनेंसिंग चैनलों के जरिए बाजार का दायरा भी बढ़ाया है। पांडे ने कहा कि अब भारत का कैपिटल मार्केट सिस्टम देश को ग्लोबल फंड मैनेजमेंट गतिविधियों का एक संभावित केंद्र बनाने की स्थिति में है।

तकनीकी और ढांचागत सुधार

पांडे ने बताया कि बाजार के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। भारत T+1 सेटलमेंट को टेस्ट करने वाला पहला बाजार था। साथ ही, आईपीओ लिस्टिंग का समय T+6 से घटाकर T+3 वर्किंग डेज कर दिया गया है। डेट मार्केट में निवेशकों की पहुंच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं। इसके अलावा, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) जैसे नए प्रोडक्ट्स ने निवेशकों और कारोबारियों को जोखिम प्रबंधन में मदद की है। बाजार में बढ़ती डिजिटल भागीदारी को देखते हुए सेबी ने साइबर सिक्योरिटी से जुड़े नियमों को भी और सख्त किया है।

इनपुट: IANS

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