CMRL-एक्सालॉजिक मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी…
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार से जुड़े सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस, दोनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिसमें दोनों दलों ने एक-दूसरे पर निशाना साधा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्यमंत्री विजयन, उनकी बेटी वीना टी और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास को सतर्कता जांच पर सात दिन की अस्थायी रोक दे दी है, ताकि वे केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील कर सकें।
यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) द्वारा वीना टी की अब बंद हो चुकी कंपनी, एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए कथित भुगतानों से जुड़ा है। हालांकि, इन आरोपों का लगातार खंडन किया जा रहा है।
भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के. सुरेंद्रन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न तो सीपीआई(एम) को जश्न मनाने का मौका मिला है और न ही कांग्रेस को खुश होने का। उन्होंने जोर देकर कहा, "अदालत ने न तो पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया है और न ही उन्हें कोई विशेष रियायत दी है।" सुरेंद्रन के मुताबिक, अदालत ने आरोपियों को अपने तर्क रखने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में देरी पर राज्य सरकार से अदालत द्वारा पूछे गए सवाल इस तर्क को बल देते हैं कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी।
वहीं, कांग्रेस नेता और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस मामले में राज्य सरकार के शुरुआती दृष्टिकोण को सही ठहराता है। चेन्निथला ने तर्क दिया कि एफआईआर रद्द न करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह दर्शाता है कि राज्य सरकार की कार्रवाई कानूनी रूप से वैध थी। उन्होंने कहा, "प्रवर्तन निदेशालय के पत्र की सावधानीपूर्वक जांच करके और एफआईआर दर्ज करने में जल्दबाजी न करते हुए प्रारंभिक जांच का आदेश देकर सरकार और गृह विभाग ने सही कदम उठाया था।"
अदालती कार्यवाही का पूरा मामला
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने विजयन और अन्य याचिकाकर्ताओं को केरल हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश के 9 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने की अनुमति दी। उस आदेश में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
इससे पहले हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उन्हें अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया और जांच पर सात दिनों के लिए रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी टिप्पणियां केवल याचिकाकर्ताओं के अपील करने के अधिकार तक सीमित हैं और इसका मामले के गुण-दोष से कोई संबंध नहीं है। अब केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ कानून के अनुसार अपील पर विचार करेगी।
इनपुट: IANS



