दिव्यांग बच्चों के देखभाल केंद्र: सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जवाबदेही, केंद्र सरकार से राज्यों का ब्योरा तलब
देशभर में दिव्यांग बच्चों के लिए चल रहे पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) की निगरानी और नियमन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता…
देशभर में दिव्यांग बच्चों के लिए चल रहे पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) की निगरानी और नियमन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विस्तृत जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया जिनमें ऐसे संस्थानों में कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू करने में प्रणालीगत खामियों की ओर ध्यान दिलाया गया था।
यह मामला दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले वकील राहुल बजाज और बच्चों के अधिकारों के पैरोकार जहीर अब्बास जान द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानूनी ढांचे के बावजूद, दिव्यांग बच्चों को गैर-पंजीकृत संस्थानों, अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, योग्य पेशेवरों की कमी और प्रभावी नियामक निगरानी के अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कानूनी ढांचे और उसकी ज़मीनी हकीकत पर सवाल
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता राहुल बजाज ने अदालत को बताया कि 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD), 2016' के तहत ऐसे सभी पुनर्वास केंद्रों के लिए राज्य स्तर पर पंजीकरण अनिवार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाने के लिए ठोस डेटा की जरूरत है कि क्या सभी राज्यों में कानूनी प्राधिकरणों का गठन हुआ है और क्या वे अपनी निगरानी की जिम्मेदारी ठीक से निभा रहे हैं।
इसके अलावा, 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017' का हवाला देते हुए बताया गया कि अब तक केवल 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ही मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए न्यूनतम मानक अधिसूचित किए हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि RPWD एक्ट की धारा 50 के तहत पंजीकरण के बिना कोई भी व्यक्ति ऐसा संस्थान नहीं चला सकता, लेकिन कई केंद्र इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को एक हलफनामे के जरिए कई बिंदुओं पर जानकारी दाखिल करने का आदेश दिया है। इसमें RPWD अधिनियम, 2016 के तहत वैधानिक प्राधिकरणों के गठन और कामकाज, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के लिए न्यूनतम मानकों की अधिसूचना, और इन पुनर्वास सुविधाओं के निरीक्षण व निगरानी के तरीकों का पूरा ब्योरा शामिल होगा।
याचिका में श्रीनगर की एक घटना का भी जिक्र किया गया, जहां 2025 में बाल कल्याण समिति द्वारा एक बाल विकास केंद्र के औचक निरीक्षण में पाया गया कि संस्थान के पास न तो RPWD एक्ट के तहत पंजीकरण था और न ही वहां पर्याप्त सुविधाएं और योग्य कर्मचारी थे। इस मामले में अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
इनपुट: IANS



