शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

OBC क्रीमी लेयर: माता-पिता की आय को आधार बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर किया रुख साफ, केंद्र की अर्जी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का निर्धारण सिर्फ़ माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष…

OBC क्रीमी लेयर: माता-पिता की आय को आधार बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर किया रुख साफ, केंद्र की अर्जी खारिज
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का निर्धारण सिर्फ़ माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें इस पर दिए गए एक पुराने फैसले में संशोधन की मांग की गई थी।

विज्ञापन

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि क्रीमी लेयर निर्धारण पर दिए गए उनके पिछले निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया जाएगा। अदालत ने साफ किया कि यह सिद्धांत सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के माध्यम से चुने गए OBC उम्मीदवारों को सेवा आवंटन पर भी लागू होगा, क्योंकि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

फैसले की पृष्ठभूमि और प्रभाव

यह मामला उन सिविल सेवा उम्मीदवारों से जुड़ा था जिन्हें OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिला था। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में काम करने वाले उनके माता-पिता की आय को आधार मानकर उन्हें 'क्रीमी लेयर' में डाल दिया था। उम्मीदवारों ने इस फैसले को पहले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में और फिर मद्रास, दिल्ली और केरल के उच्च न्यायालयों में चुनौती दी थी, जहाँ उन्हें राहत मिली थी।

इस साल मार्च में, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अपीलों को खारिज करते हुए उसे छह महीने के भीतर उम्मीदवारों के दावों पर विचार करने का निर्देश दिया था। अपने ताजा आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि 11 मार्च 2026 के फैसले में तय किए गए सिद्धांत के अनुसार ही CSE 2025 के उम्मीदवारों को सेवाएं आवंटित की जाएंगी।

पुराने मामलों और नई प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस फैसले के कारण पहले पूरी हो चुकी नियुक्तियों या सेवा आवंटन को फिर से नहीं खोला जाएगा और न ही किसी कर्मचारी की वरिष्ठता में कोई बदलाव होगा। हालांकि, अदालत ने कहा कि 1993 के कार्यालय ज्ञापन और 2004 के स्पष्टीकरण पत्र पर उसकी व्याख्या बाध्यकारी रहेगी। पीठ ने यह भी कहा कि समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के जो मामले विभिन्न अदालतों या न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, उन पर मार्च के फैसले की रोशनी में विचार किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर निर्धारण के लिए एक समान तंत्र बनाने और सरकारी पदों व PSU जैसे अन्य संगठनों के पदों के बीच समानता स्थापित करने के लिए दो साल का समय मांगा था। इस पर अदालत ने कोई समय-सीमा तय करने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र का मामला है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले के अनुपालन के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दे दिया है।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →