पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के जज ने खुद को अलग किया, अब CJI करेंगे नई बेंच का गठन
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह याचिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें…
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शील नागू ने पंजाब सरकार की एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह याचिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD समेत अन्य लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया गया था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस नागू के इस कदम के बाद अब मामले की सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा एक नई बेंच का गठन किया जाएगा।
शुक्रवार को जब यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने आया, तो जस्टिस दत्ता ने सूचित किया कि जस्टिस नागू इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते। इसके बाद बेंच ने आदेश दिया कि मामले को नई बेंच के गठन के लिए CJI के पास भेजा जाए। गौरतलब है कि मामलों के आवंटन और बेंच गठित करने का अधिकार CJI के पास होता है। इससे एक दिन पहले भी मामले की सुनवाई टल गई थी क्योंकि जस्टिस दत्ता ने कहा था कि फाइल देर से मिलने के कारण जस्टिस नागू को दस्तावेजों का अध्ययन करने का मौका नहीं मिला।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पंजाब के DGP गौरव यादव को लिखे गए तीन पत्रों से उपजा है। इन पत्रों में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजवीर घुम्मन और उनके सहयोगी नितिन गोहल तथा बीर देविंदर प्रशासनिक तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी टेंडरों में कथित तौर पर हस्तक्षेप कर रहे थे। ED ने इन आरोपों पर FIR दर्ज करने की मांग की थी।
जब पंजाब पुलिस ने ED के पत्रों के आधार पर FIR दर्ज नहीं की, तो अधिवक्ता निखिल सराफ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी। याचिका में मांग की गई कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए मामला CBI को सौंपा जाए, ताकि यह पंजाब पुलिस और सतर्कता विभाग के प्रभाव से मुक्त रह सके।
हाईकोर्ट का आदेश और CBI की कार्रवाई
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही CBI ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार को चंडीगढ़ और पंजाब में आठ जगहों पर तलाशी भी ली, जिसमें मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय और राजवीर घुम्मन से जुड़े परिसर भी शामिल थे। इसके बाद बुधवार को घुम्मन और अन्य सहयोगियों को पूछताछ के लिए समन भी जारी किया गया।
इनपुट: IANS



