पंजाबी फ़िल्म 'सतलुज' पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का सवाल: 25,000 लोगों का आँकड़ा कहाँ से आया?
केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में आई पंजाबी फिल्म 'सतलुज' को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर 'रचनात्मक स्वतंत्रता' यानी क्रिएटिव फ्रीडम की आड़ में इतिहास से छ
केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में आई पंजाबी फिल्म 'सतलुज' को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर 'रचनात्मक स्वतंत्रता' यानी क्रिएटिव फ्रीडम की आड़ में इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, बिट्टू ने फिल्म में दिखाए गए 25,000 लापता लोगों के आंकड़े के लिए सबूत मांगे हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में चंडीगढ़ में खालिस्तानी आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक बयान में फिल्म के निर्देशक और निर्माता को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, "पंजाब का दर्दनाक इतिहास किसी खास कहानी के मुताबिक चुनिंदा तरीके से पेश करने की चीज नहीं है।"
सबूत पेश करने की चुनौती
मंत्री ने फिल्म निर्माताओं से वे सभी दस्तावेजी सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निष्कर्ष सार्वजनिक करने को कहा है, जिनके आधार पर फिल्म में 25,000 लोगों के लापता होने या अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने पूछा कि अगर यह संख्या सिर्फ एक अनुमान है, तो इसे एक स्थापित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में क्यों दिखाया जा रहा है?
इतिहास के एकतरफा चित्रण पर आपत्ति
रवनीत सिंह बिट्टू ने इस बात पर भी जोर दिया कि फिल्म में आतंकवाद के दौर की पूरी सच्चाई नहीं दिखाई गई है। उन्होंने कई अहम सवाल उठाए:
- आतंकवाद के दौरान मारे गए निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों और आम नागरिकों की हत्याओं को गंभीरता से क्यों नहीं दिखाया गया?
- पंजाब पुलिस, सुरक्षा बलों और आतंकवाद से लड़ने वाले बहादुर नागरिकों के बलिदान को कम महत्व क्यों दिया गया?
- आतंकवादी हिंसा से बर्बाद हुए हजारों परिवारों का दर्द कहानी से गायब क्यों है?
उन्होंने कहा कि इतिहास का सिर्फ एक पक्ष बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और दूसरे पीड़ितों का दर्द नजरअंदाज करना सही नहीं है।
सरकार कर सकती है कार्रवाई
केंद्रीय राज्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर फिल्म निर्माता 25,000 के आंकड़े का दस्तावेजी आधार पेश नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि यह आंकड़ा आधिकारिक तौर पर सत्यापित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा न करने पर सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार करेगी कि ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश न किया जाए। बिट्टू ने जोर देकर कहा, "प्रोपेगैंडा पर सच, कल्पना पर तथ्य और भावनाओं पर सबूतों की जीत होनी चाहिए।"
इनपुट: IANS



