CMRL-एक्सालॉजिक मामला: ED की मांग पर सीधे FIR नहीं, केरल सरकार पहले सतर्कता विभाग से कराएगी 'त्वरित सत्यापन'
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की मांग पर केरल सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है। सीधे FIR दर्ज करने के बजाय, सरकार ने पहले…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की मांग पर केरल सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है। सीधे FIR दर्ज करने के बजाय, सरकार ने पहले राज्य के सतर्कता विभाग द्वारा एक 'त्वरित सत्यापन' (quick verification) कराने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले आरोपों का तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित आधार हो।
यह पूरा मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और पिनारयी विजयन की बेटी टी. वीना की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। ED ने अपनी जांच के निष्कर्षों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसके लिए एजेंसी ने राज्य पुलिस प्रमुख रावड़ा ए चंद्रशेखर को सहायक दस्तावेजों के साथ 25 पन्नों की एक रिपोर्ट भी सौंपी है।
कानूनी राय और सबूतों का मूल्यांकन
केरल सरकार फिलहाल इस मामले पर विस्तृत कानूनी चर्चा कर रही है और कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले औपचारिक कानूनी सलाह का इंतजार कर रही है। सरकार को आशंका है कि अगर बिना किसी स्वतंत्र प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज की जाती है, तो इस कदम को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सबूतों से किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो FIR दर्ज करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
एक प्रमुख कानूनी मुद्दा यह है कि ED द्वारा PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत दर्ज किए गए बयानों का साक्ष्य के तौर पर कितना मूल्य है। माना जा रहा है कि ED की सिफारिश काफी हद तक CMRL के मुख्य वित्तीय अधिकारी और मामले में आरोपी पी. सुरेश कुमार के बयान पर आधारित है। सवाल यह है कि क्या किसी आरोपी का बयान ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सतर्कता मामले का आधार बन सकता है। इसी वजह से स्वतंत्र पुष्टि करने वाले सबूत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
जांच के केंद्र में कौन?
ED ने अपनी जांच में अंतरिम निपटान बोर्ड के निष्कर्षों पर भी भरोसा किया है, जिसमें पाया गया कि CMRL ने एक्सालॉजिक को भुगतान इसलिए किया क्योंकि टी. वीना तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की बेटी थीं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि बोर्ड के इन निष्कर्षों को अभी तक कानूनी रूप से पलटा नहीं गया है। भविष्य में होने वाली किसी भी सतर्कता जांच के दायरे में CMRL के शीर्ष अधिकारी ससिधरन कार्था और कथित भुगतानों में शामिल अन्य लोग भी आ सकते हैं।
इनपुट: IANS



