शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

संबलपुर में फर्जी सिम रैकेट का पर्दाफाश, जामताड़ा के साइबर अपराधियों से जुड़े तार

ओडिशा के संबलपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो ग्राहकों के पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम कार्ड बनाता और बेचता था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में…

संबलपुर में फर्जी सिम रैकेट का पर्दाफाश, जामताड़ा के साइबर अपराधियों से जुड़े तार
(फोटो: IANS)

ओडिशा के संबलपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो ग्राहकों के पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम कार्ड बनाता और बेचता था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और जांच में इसके तार झारखंड के कुख्यात साइबर अपराध केंद्र जामताड़ा से जुड़े पाए गए हैं।

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय सूरज बाग, 29 वर्षीय मालती ओराम उर्फ माला और 32 वर्षीय पापू उर्फ शेख परवेज के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह रैकेट तब सामने आया जब वे संबलपुर साइबर पुलिस स्टेशन में 22 सितंबर, 2026 को दर्ज एक मामले (केस नंबर 34/26) की जांच कर रहे थे।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

आरोपियों की कार्यप्रणाली बेहद शातिराना थी। वे ग्राहकों के पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके एक ही नंबर पर कई सिम कार्ड जारी करवाते थे। इनमें से एक सिम कार्ड असली ग्राहक को दे दिया जाता था, जबकि बाकी सिम वे अपने पास रख लेते थे। बाद में इन्हीं अतिरिक्त सिम कार्डों को दूसरों को बेच दिया जाता था। जांच में पता चला कि इनमें से कुछ सिम का इस्तेमाल जामताड़ा में बैठे साइबर अपराधी धोखाधड़ी करने के लिए कर रहे थे। गिरोह के सदस्य सिम बेचकर होने वाली कमाई को आपस में बांट लेते थे।

बरामदगी और आगे की जांच

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया है। इसमें चार मोबाइल फोन, चार सक्रिय सिम कार्ड, एयरटेल के 120 सीलबंद खाली सिम कार्ड, तीन बैंक पासबुक, एक चेक बुक, एक आधार कार्ड और एक फोनपे क्यूआर कोड स्कैनर शामिल हैं। इसके अलावा चार हलफनामे, किराए का एग्रीमेंट, एयरटेल के 10 पैम्फलेट और चार 5जी प्लस साइनबोर्ड भी बरामद हुए हैं।

पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि गिरोह में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अब तक कुल कितने फर्जी सिम बनाए और बेचे गए, इन्हें किसने खरीदा और इस पूरे रैकेट में कितने पैसों का लेनदेन हुआ। अधिकारियों के अनुसार, जामताड़ा कनेक्शन जांच का एक मुख्य केंद्र बना हुआ है, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर ऐसे ही फर्जी सिम का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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