पंजाब: नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या के बाद सियासत गरमाई, हरसिमरत कौर ने अमित शाह को पत्र लिख CBI जांच की मांग की
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की दिनदहाड़े हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह…
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की दिनदहाड़े हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह पत्र शाह के पंजाब दौरे से ठीक एक दिन पहले सोमवार को भेजा गया। इसमें कौर ने राज्य में नेताओं, पुलिस और ड्रग माफिया के बीच कथित सांठगांठ की भी व्यापक जांच की मांग की है।
पत्र का केंद्र बिंदु मानसा के नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या है। हरसिमरत कौर ने बताया कि झोटा इलाके में नशीली दवाओं और सिंथेटिक नशों की अवैध बिक्री के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे थे। अपनी हत्या से ठीक पहले, उन्होंने मानसा के डीएसपी को एक केमिस्ट की दुकान पर नशीली दवाएं बेचे जाने की सूचना दी थी और पुलिस से वहां पहुंचने को कहा था।
हत्या का घटनाक्रम और पुलिस पर आरोप
पत्र के मुताबिक, पुलिस के मौके पर न पहुंचने पर परविंदर झोटा ने मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार द्वारा नशीली दवाओं की बिक्री को फेसबुक पर लाइव-स्ट्रीम करना शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद, अश्विनी ने किसी को फोन किया और फिर झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी, जिसमें दो अन्य लोग भी घायल हो गए।
झोटा के पिता भीम सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या "राजनेता-पुलिस-ड्रग माफिया गठजोड़" का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका बेटा जेल में था, तब मानसा के तत्कालीन एसएसपी ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाना बंद नहीं किया तो उसे खत्म कर दिया जाएगा। भीम सिंह ने मानसा के डीएसपी संजीव गोयल पर नशीले पदार्थ बनाने वाली इकाइयां चलाने का भी आरोप लगाया।
निष्पक्ष जांच की मांग
हरसिमरत कौर ने अपने पत्र में इस बात पर हैरानी जताई कि हत्या के आरोपी अश्विनी कुमार को जेल से छूटने के कुछ महीने बाद ही 2024 में हथियार का लाइसेंस कैसे मिल गया, जबकि उस पर पहले से ही नशीली दवाएं बेचने के कई आरोप थे। उन्होंने लिखा, "यह सब बताता है कि अश्विनी के पीछे बहुत ताकतवर लोग (गॉडफादर) थे।" उन्होंने कहा कि केवल एक उच्च-स्तरीय और निष्पक्ष जांच ही इन प्रभावशाली लोगों को बेनकाब कर सकती है।
अपने पत्र में कौर ने अन्य नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें सुनाम के मोहनजीत सिंह और आत्महत्या करने वाले गुलजार सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में व्हिसलब्लोअर्स को चुप कराया जा रहा है, जबकि ड्रग तस्कर बेखौफ काम कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



