सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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RBI के दखल से मजबूत हुआ रुपया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव कायम

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लगातार हस्तक्षेप ने घरेलू मुद्रा को…

RBI के दखल से मजबूत हुआ रुपया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव कायम
(फोटो: IANS)

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लगातार हस्तक्षेप ने घरेलू मुद्रा को सहारा दिया, जिससे यह 22 पैसे की बढ़त के साथ 94.75 पर पहुंच गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते भी रुपए ने केंद्रीय बैंक के समर्थन से लगभग चार वर्षों में अपना सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज किया था।

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सोमवार को रुपया अपने पिछले बंद स्तर 94.97 के मुकाबले 8 पैसे मजबूत होकर 94.89 पर खुला था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को एक तरह की 'सॉफ्ट डिफेंस लाइन' बना लिया है। केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार डॉलर की बिक्री से रुपए को और कमजोर होने से रोका जा रहा है।

विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव

इस महीने रुपए पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली का भी दबाव रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 16 अक्टूबर तक FII ने कुल 54,636 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जो सितंबर के पूरे महीने के आंकड़े से भी ज्यादा है। हालांकि, हाल के दिनों में इस बिकवाली की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। 16 अक्टूबर को FII मामूली शुद्ध खरीदार भी बने थे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस अस्थायी बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.3% से घटकर 5.08% पर आना और दूसरा, रुपए का 95 के स्तर से नीचे मजबूत होना। हालांकि, वे मानते हैं कि यह बदलाव रणनीतिक (tactical) ज्यादा और संरचनात्मक (structural) कम है। FII अभी भी वित्तीय और तेल शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि उपभोक्ता सेवा क्षेत्र की कंपनियों में खरीदारी कर रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतें बनी हुई हैं चिंता

बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। हालांकि, सोमवार को इसमें कुछ नरमी आई और यह करीब 1 प्रतिशत गिरकर 108 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। विश्लेषकों ने इस गिरावट का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से जुड़े नए प्रतिबंधों में कुछ छूट देने के फैसले को बताया, जिससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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