वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल पर अमेरिका की नज़र, रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में प्रोसेसिंग पर होगी बात
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की तीन दिवसीय भारत यात्रा का एक बड़ा एजेंडा ऊर्जा सहयोग है, जिसके केंद्र में वेनेजुएला से भारी कच्चे तेल का आयात और उसे प्रोसेस करने की क्षमता है। समाचार एजेंसी IANS…
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की तीन दिवसीय भारत यात्रा का एक बड़ा एजेंडा ऊर्जा सहयोग है, जिसके केंद्र में वेनेजुएला से भारी कच्चे तेल का आयात और उसे प्रोसेस करने की क्षमता है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, रुबियो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के साथ बातचीत करेगा ताकि वेनेजुएला से अधिक तेल आयात कर उसे गुजरात की जामनगर रिफाइनरी में प्रोसेस किया जा सके।
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका ने वेनेजुएला के उन तेल क्षेत्रों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है जहाँ से भारी कच्चा तेल (Heavy Crude Oil) निकलता है। इस ख़ास किस्म के तेल को प्रोसेस करने की तकनीकी क्षमता दुनिया की कुछ ही रिफाइनरियों में है, और रिलायंस की जामनगर यूनिट उनमें से एक है।
व्यापार और ऊर्जा पर केंद्रित दौरा
मुंबई पहुंचने के बाद मार्को रुबियो ने अपनी यात्रा की शुरुआत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गेटवे ऑफ इंडिया पर मुलाकात के साथ की। बाद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत के मुख्य विषयों में व्यापार वार्ता, ऊर्जा सहयोग, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और महत्वपूर्ण खनिजों के अलावा रूस और वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात से जुड़े नीतिगत मामले शामिल रहे। उम्मीद है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग और मज़बूत होगा।
व्यापार समझौते और रूसी तेल पर अमेरिकी रुख
यह 2026 में रुबियो की भारत की दूसरी यात्रा है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है, जिससे यह संभावना भी जताई जा रही है कि इस दौरे पर उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, इसी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों के चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारत को संभावित शुल्कों से छूट दी थी।
दरअसल, ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए रूसी तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर लगने वाले 100% शुल्क को माफ कर दिया था। अगर यह छूट न मिलती तो चीन के बाद रूसी तेल के दूसरे सबसे बड़े खरीदार भारत पर भी इसका असर पड़ता। पिछले हफ्ते भारत का बचाव करते हुए रुबियो ने उसे अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार बताया था। उन्होंने कहा था, "भारत जैसे देशों ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वे अब भी रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं, क्योंकि एक दिन से दूसरे दिन ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत को बदलना मुश्किल है।"
इनपुट: IANS



