500 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: ED ने चंडीगढ़-मोहाली में की छापेमारी, 72 लाख नकद ज़ब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 500 करोड़ रुपये के एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई की है। कोरवियो कॉइन (KRO) से जुड़ी इस धोखाधड़ी के मामले में एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 500 करोड़ रुपये के एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई की है। कोरवियो कॉइन (KRO) से जुड़ी इस धोखाधड़ी के मामले में एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में कई जगहों पर छापेमारी की। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तलाशी अभियान में 72 लाख रुपये नकद और संपत्ति से जुड़े कई अहम दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं।
ईडी के शिमला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने यह कार्रवाई 28 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की थी। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड भी जब्त किए गए। जांच एजेंसी ने इस मामले के मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा के एक करीबी सहयोगी अतुल सूद को भी गिरफ्तार कर लिया है।
मास्टरमाइंड का सहयोगी गिरफ्तार
जांच में पता चला है कि अतुल सूद, घोटाले के मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा से मिलने दुबई गया था। वह शर्मा के लिए कॉन्फ्रेंस और दूसरे कार्यक्रम आयोजित करने में मदद करता था। ये गतिविधियाँ तब भी जारी थीं, जब इस धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी थी। ईडी ने अतुल सूद को 29 अक्टूबर को शिमला की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे 5 नवंबर तक की हिरासत में भेज दिया गया है।
कैसे काम करती थी पोंजी स्कीम?
यह पूरा घोटाला एक पोंजी मॉडल पर आधारित था, जिसमें निवेशकों को मोटे मुनाफ़े का लालच देकर कोरवियो कॉइन (KRO) में निवेश करने के लिए उकसाया जाता था। हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा सुभाष शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी।
ईडी के अनुसार, सुभाष शर्मा ने अपने सहयोगियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना चलाई। इस मॉडल में नए निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था, जिससे मुनाफ़े का भ्रम बना रहे।
24 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित
बरामद डिजिटल डेटा से खुलासा हुआ है कि इस धोखाधड़ी से 24 लाख से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए और इसमें 219 मिलियन डॉलर से ज़्यादा का लेन-देन हुआ। निवेशकों को कुल मिलाकर लगभग 500 करोड़ रुपये का नुक़सान होने का अनुमान है। ईडी ने बताया कि निवेशकों से जुटाई गई ज़्यादातर रक़म नकद में लेकर टीम लीडरों को दी जाती थी, और फिर यह पैसा मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा और उसके सहयोगियों विजय कुमार जुनेजा व मासूम जुनेजा तक पहुँचाया जाता था। इस पैसे का कुछ हिस्सा ज़मीन-जायदाद ख़रीदने में भी लगाया गया।
इस मामले में ईडी पहले भी सुभाष शर्मा के कई सहयोगियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा, मिलन गर्ग और मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी ने उनके खिलाफ़ शिमला की विशेष अदालत में आरोप पत्र भी दाख़िल कर दिए हैं। मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा हज़ारों निवेशकों को ठगने के बाद दुबई भाग गया है।
इनपुट: IANS



