कोयला गैसीकरण: 46,000 करोड़ के निवेश से आत्मनिर्भर ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और उर्वरक से लेकर गैस तक के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) तकनीक पर बड़ा दांव लगा रहा है। इस दिशा में देश में 46,000 करोड़ रुपये…
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और उर्वरक से लेकर गैस तक के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) तकनीक पर बड़ा दांव लगा रहा है। इस दिशा में देश में 46,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार इस तकनीक के माध्यम से कोयले को सिनगैस, अमोनिया, यूरिया और मेथनॉल जैसे उपयोगी उत्पादों में बदलने की परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है।
कोयला आज भी भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है। देश की प्राथमिक ऊर्जा में इसकी हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है, जबकि कुल बिजली उत्पादन का 74 प्रतिशत कोयले पर ही आधारित है। इसी महत्व को देखते हुए सरकार अब कोयले के पारंपरिक इस्तेमाल से आगे बढ़कर उसके स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
कोयला गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में 'अग्रसर भारत मंच' कार्यक्रम में बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले का गैसीकरण करना है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अहम योजना को मंज़ूरी दी है। इसके तहत सतही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात को कम करना है।
महत्वपूर्ण खनिजों पर भी सरकार का ज़ोर
कोयले के अलावा, सरकार महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। इन खनिजों की इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सौर ऊर्जा इकाइयों, दूरसंचार और रक्षा उपकरणों जैसे उच्च-तकनीकी उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका होती है। श्री रेड्डी के अनुसार, भारत विदेशों में भी खनन परिसंपत्तियों की तलाश, अन्वेषण और खनिजों के निष्कर्षण के अवसर तलाश रहा है।
इस संबंध में उन्होंने कहा, “हम फिलहाल अर्जेंटीना की खदानों में अन्वेषण कर रहे हैं और साथ ही अन्य देशों के साथ भी बातचीत जारी है।” सरकार भारतीय उद्यमियों को विदेशों में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित कर रही है। गौरतलब है कि 2025 में खान मंत्रालय के उपक्रम MECL ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत से एक समझौता किया था, जिसका उद्देश्य लिथियम जैसे खनिजों का अन्वेषण करना है। लिथियम EV बैटरी के लिए एक ज़रूरी खनिज है।
रेयर अर्थ कॉरिडोर और आत्मनिर्भरता
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 'रेयर अर्थ एलिमेंट कॉरिडोर' विकसित कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से भारत जल्द ही रेयर अर्थ तत्वों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा, जिससे रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू औद्योगिक क्षमता मज़बूत होगी।
इनपुट: IANS



