थाईलैंड पर दो उइगर पुरुषों को चीन न भेजने का दबाव, मानवाधिकार संगठन ने जताई गंभीर चिंता
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (HRW) ने थाईलैंड सरकार से दो उइगर पुरुषों को जबरन चीन निर्वासित न करने की पुरजोर अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि चीन भेजे जाने पर उन्हें…
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (HRW) ने थाईलैंड सरकार से दो उइगर पुरुषों को जबरन चीन निर्वासित न करने की पुरजोर अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि चीन भेजे जाने पर उन्हें प्रताड़ना, जबरन गुमशुदगी और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ये दोनों व्यक्ति 2014 से थाईलैंड की हिरासत में हैं।
इन दोनों उइगर पुरुषों को हाल ही में शाही माफी के बाद बैंकॉक की सेंट्रल जेल से एक इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस कदम को उनकी चीन वापसी की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके वकीलों ने थाई अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि वे चीन नहीं लौटना चाहते। सुरक्षा कारणों से दोनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
चीन की मांग और थाईलैंड का पिछला रिकॉर्ड
HRW की एशिया डायरेक्टर एलेन पियर्सन ने कहा, "थाईलैंड की पिछली सरकारों ने उइगुर लोगों को सालों तक अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखा और फिर बीजिंग की मांग मानते हुए उन्हें चीन भेज दिया, जहां वे जबरन गायब कर दिए गए।" उन्होंने प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल से यह सिलसिला रोकने और दोनों को किसी सुरक्षित तीसरे देश में जाने की अनुमति देने का आग्रह किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, थाई विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अगस्त में एक संसदीय समिति को बताया था कि बैंकॉक स्थित चीनी दूतावास ने इन दोनों व्यक्तियों को चीन वापस भेजने की मांग की थी।
हिरासत और कानूनी स्थिति
थाई अधिकारियों ने इन दोनों को 2014 से हिरासत में रखा है, जब उनमें से एक की उम्र सिर्फ 14 साल थी। वे जनवरी 2020 में इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर से भागने की कोशिश से जुड़े अपराधों के लिए जेल की सजा काट रहे थे। सात साल की सजा का अधिकांश हिस्सा पूरा करने के बाद, उन्हें 21 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक सेंट्रल जेल से सुआन फ्लू इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर ले जाया गया।
थाई आप्रवासन अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) को भी इन व्यक्तियों से मिलकर उनके शरणार्थी दर्जे का निर्धारण करने की अनुमति नहीं दी है। HRW ने थाईलैंड को अंतरराष्ट्रीय कानून के 'वापसी निषेध' सिद्धांत का सम्मान करने की उसकी बाध्यता याद दिलाई, जो किसी व्यक्ति को ऐसे स्थान पर भेजने से रोकता है जहां उसकी जान को खतरा हो या उसे गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता हो।
इनपुट: IANS



