तमिलनाडु में चावल की कीमतें आसमान पर, पोन्नी समेत कई किस्में एक महीने में महंगी
तमिलनाडु के घरों में इस्तेमाल होने वाले मुख्य खाद्यान्न पोन्नी चावल समेत कई लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में पिछले एक महीने में भारी उछाल आया है। राज्य में धान के उत्पादन में कमी और पड़ोसी राज्यों से…
तमिलनाडु के घरों में इस्तेमाल होने वाले मुख्य खाद्यान्न पोन्नी चावल समेत कई लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में पिछले एक महीने में भारी उछाल आया है। राज्य में धान के उत्पादन में कमी और पड़ोसी राज्यों से आपूर्ति बाधित होने को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कुरुवई धान की फसल कमजोर रहती है और दूसरे राज्यों से सप्लाई नहीं सुधरती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पोन्नी चावल का दाम 65 रुपये से बढ़कर 78 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। वहीं, प्रीमियम पोन्नी की कीमत 82 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पहले 65 रुपये थी। व्यापारियों का कहना है कि बीते 50 दिनों में चावल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।
क्यों बढ़े चावल के दाम?
कीमतों में इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कम बारिश और सिंचाई के लिए पानी की कमी ने धान की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके अलावा, तमिलनाडु की चावल मिलें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से आने वाले धान पर भी निर्भर हैं, जहां पैदावार घटने से आपूर्ति कम हो गई है। राइस मिल मालिकों के अनुसार, दूसरे राज्यों से आने वाले धान की खरीद कीमत पिछले सीजन के 32 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अब करीब 44 रुपये प्रति किलो हो गई है।
अन्य किस्मों पर भी असर
महंगाई का असर सिर्फ पोन्नी चावल तक सीमित नहीं है। मन्नाचनल्लूर पोन्नी 60 रुपये से 68 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इसी तरह, आईआर-20 चावल की कीमत भी 50 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। सामान्य कच्चे चावल (रॉ राइस) का दाम भी 45 रुपये से बढ़कर कई दुकानों में 68 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है।
भविष्य को लेकर चिंता और उम्मीदें
व्यापारियों और कृषि क्षेत्र के जानकारों ने राज्य में उपभोक्ताओं की पसंद वाली धान की किस्मों की खेती बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि, मिल मालिकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में नई फसल आने से धान की आपूर्ति सुधरेगी और कीमतों में स्थिरता आ सकती है। इसके विपरीत, खुदरा व्यापारी अभी भी कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जता रहे हैं।
इनपुट: IANS



