केरल: PSC नियुक्तियों पर विवाद गहराया, भाजपा ने LDF सरकार के पूरे कार्यकाल की जांच की मांग की
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद गरमा गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी.…
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद गरमा गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने पिछली LDF सरकार के दौरान हुई सभी PSC नियुक्तियों की व्यापक जांच और समीक्षा की मांग उठाई है।
यह मांग ऐसे समय में आई है जब विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में पहले ही दो PSC सदस्यों से पूछताछ कर चुका है। PSC अध्यक्ष डॉ. एम. आर. बैजू को भी बुधवार को SIT के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। मुरलीधरन ने वी.डी. सतीशन सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की बजाय उनका बचाव कर रही है।
राज्यपाल की सिफारिश और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब रविवार को यह खबर सामने आई कि राज्यपाल ने PSC बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। मुरलीधरन ने इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल की इस कार्रवाई का सीपीआई (एम) द्वारा विरोध करना तो समझ में आता है, लेकिन सवाल यह है कि कांग्रेस और यूडीएफ इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?" सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने राज्यपाल की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है, जिस पर मुरलीधरन ने उनसे अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करने को कहा है।
सरकार का पक्ष और शिकायतों का अंबार
सोमवार को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा को सूचित किया था कि राज्य पुलिस प्रमुख को PSC में अनियमितताओं से संबंधित 180 शिकायतें मिली हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग से मिली तीन शिकायतों को जांच के लिए गृह विभाग के माध्यम से क्राइम ब्रांच को भेजा गया है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर राज्यपाल ने 21 अगस्त को PSC सचिव से स्पष्टीकरण मांगा था, जिसके बाद राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी गई।
न्यायिक टिप्पणी और जांच की मांग
वी. मुरलीधरन ने अदालत की एक हालिया टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की आलोचना की गई थी। अदालत ने कहा था कि जब अनियमितताओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, तब दोनों दल एक-दूसरे को बचा रहे थे। मुरलीधरन ने कहा कि PSC में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए पिछली LDF सरकार की सभी नियुक्तियों की समीक्षा करना, मुख्य आरोपियों से पूछताछ करना और दोषियों पर कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।
इनपुट: IANS



