RBI की ब्याज दर बढ़ोतरी पर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया: फैसला उम्मीद के मुताबिक, पर आगे की राह डेटा पर निर्भर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 44 महीनों के लंबे अंतराल के बाद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उद्योग जगत ने इस कदम को वैश्विक तनाव और अन्य केंद्रीय बैंकों…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 44 महीनों के लंबे अंतराल के बाद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उद्योग जगत ने इस कदम को वैश्विक तनाव और अन्य केंद्रीय बैंकों के फैसलों को देखते हुए अपेक्षित बताया है। उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) ने बुधवार को कहा कि आरबीआई का यह फैसला उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप ही है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की है, जिसके बाद यह 5.5 प्रतिशत हो गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां सामने हैं। इसके साथ ही, आरबीआई ने अपने मौद्रिक नीति के रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'चरणबद्ध सख्ती' कर दिया है।
उद्योग ने क्या कहा?
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, “44 महीने बाद नीतिगत दर में बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों और दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के फैसलों को देखते हुए उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप है।” संगठन का मानना है कि आगे किसी भी तरह की सख्ती का फैसला पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए।
संगठन के सीईओ एवं महासचिव डॉ. रणजीत मेहता ने इस फैसले से महंगाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “वैश्विक ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और घरेलू खाद्य कीमतों पर दबाव के बीच मौद्रिक नीति के रुख को चरणबद्ध सख्ती की ओर ले जाने से महंगाई के रुझान को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।”
आगे की राह और प्राथमिकताएं
डॉ. मेहता के अनुसार, अब प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि मौद्रिक सख्ती आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रहे और साथ ही उत्पादक क्षेत्रों के लिए पर्याप्त ऋण का प्रवाह भी बना रहे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महंगाई पर काबू पाने के लिए सिर्फ मौद्रिक नीति ही काफी नहीं है, बल्कि आपूर्ति क्षमता, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा में भी तेजी से सुधार करना होगा।
पीएचडीसीसीआई के बयान में यह भी कहा गया है कि देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, जिसे निजी खपत, मजबूत निवेश, लचीले निर्यात और वित्तीय प्रणाली की मजबूत स्थिति से समर्थन मिल रहा है। आरबीआई के अन्य फैसलों के तहत, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर बने हुए हैं।
इनपुट: IANS



