बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आज RBI ले सकता है रेपो रेट पर बड़ा फैसला

देश में बढ़ती खुदरा महंगाई, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) अपनी द्विमासिक समीक्षा…

बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आज RBI ले सकता है रेपो रेट पर बड़ा फैसला
(फोटो: IANS)

देश में बढ़ती खुदरा महंगाई, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) अपनी द्विमासिक समीक्षा के नतीजों का ऐलान करने वाली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ इस बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि हो सकती है।

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति का यह फैसला ऐसे समय में आ रहा है जब वैश्विक और घरेलू, दोनों ही मोर्चों पर आर्थिक चिंताएं बढ़ी हुई हैं। पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था, लेकिन मौजूदा हालात ने नीतिगत रुख में बदलाव की संभावनाओं को प्रबल कर दिया है।

विशेषज्ञ क्यों जता रहे हैं बढ़ोतरी की आशंका?

इस बार रेपो रेट में वृद्धि की उम्मीद के पीछे कई ठोस कारण हैं। बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) का अनुमान है कि आरबीआई दिसंबर तक इंतजार करने के बजाय इसी बैठक में 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं, एसबीआई रिसर्च ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मुद्रास्फीति का बढ़ता दबाव, कमजोर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और बदलते वैश्विक जोखिमों को देखते हुए 25 आधार अंकों की दर वृद्धि का मामला मजबूत दिखता है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बाद में कदम उठाने से बेहतर है कि अभी से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जाए।

महंगाई का बढ़ता दबाव

अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। इसके अलावा, अल नीनो के प्रभाव और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका से रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे खाद्य महंगाई का जोखिम और बढ़ने की आशंका है। इन घरेलू चिंताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने भी आरबीआई के लिए लंबे समय तक ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखना मुश्किल बना दिया है।

अब सभी की निगाहें आरबीआई के फैसले पर टिकी हैं। केंद्रीय बैंक रेपो रेट पर क्या निर्णय लेता है, और भविष्य के लिए महंगाई व आर्थिक विकास को लेकर उसका क्या अनुमान रहता है, इसी से आने वाले महीनों में बाजार और ब्याज दरों की दिशा तय होगी।

इनपुट: IANS

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