RBI का बड़ा कदम: फ्रीलांसरों और सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए नियमों में ढील, अब नहीं भरना होगा अलग से EDF
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के लाखों फ्रीलांसरों, यूट्यूबर्स और सर्विस एक्सपोर्ट करने वाले पेशेवरों के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब उन्हें विदेशी ग्राहकों से मिली कमाई के लिए अलग से…
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के लाखों फ्रीलांसरों, यूट्यूबर्स और सर्विस एक्सपोर्ट करने वाले पेशेवरों के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब उन्हें विदेशी ग्राहकों से मिली कमाई के लिए अलग से 'एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म' (EDF) जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वे पेमेंट से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारी अपने बैंक को दे देते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने EDF की शर्त पूरी कर दी है।
यह बदलाव RBI द्वारा जारी 'विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात) (दूसरा संशोधन) विनियम, 2026' के तहत किया गया है। 2 नवंबर को अधिसूचित किए गए इन नए नियमों को पिछली तारीख, यानी 1 अक्टूबर, 2026 से लागू माना गया है।
क्या है एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म (EDF)?
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत, EDF एक ज़रूरी दस्तावेज़ है। इसे निर्यातक अपने अधिकृत डीलर (AD) बैंक में जमा करते हैं। इसमें विदेश में दी गई सेवाओं और वहां के ग्राहकों से मिलने वाले संभावित भुगतान का पूरा ब्योरा होता है। इसी जानकारी के आधार पर बैंक, RBI के 'एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम' (EDPMS) में लेनदेन को दर्ज करते हैं और विदेश से आने वाले पैसे को ट्रैक करते हैं।
नए नियमों से किसे और कैसे मिलेगी राहत?
RBI के इस स्पष्टीकरण से उन सभी 'निवासी व्यक्तियों' को फ़ायदा होगा जो विदेश में अपनी सेवाएं देकर कमाई करते हैं। RBI ने 'निवासी व्यक्ति' को भारत में रहने वाले एक वास्तविक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया है।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
- फ्रीलांसरों के लिए: अब सिर्फ़ अपने बैंक को भुगतान की पूरी जानकारी देना ही EDF जमा करने के बराबर माना जाएगा।
- अनिवासी निर्यातकों के लिए: अगर किसी सेवा के लिए आने वाला भुगतान 10 लाख रुपए से ज़्यादा नहीं है, तो उनके लिए भी EDF को स्वतः जमा मान लिया जाएगा।
- एक से ज़्यादा निर्यात पर: जो निर्यातक एक महीने में कई ग्राहकों को सेवाएं देते हैं, वे उन सभी के लिए एक ही EDF जमा कर सकते हैं।
इससे पहले सितंबर में जारी व्यवस्था के तहत, सेवा निर्यातकों को इनवॉइस जारी होने वाले महीने के खत्म होने के 30 दिनों के अंदर EDF जमा करना अनिवार्य था। नए नियमों से यह प्रक्रिया काफ़ी सरल हो गई है।
आयात के नियमों में भी बदलाव
संशोधित नियमों के अनुसार, अधिकृत डीलर बैंकों को अब IDPMS (इम्पोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) में सेवा आयात का विवरण भी दर्ज करना होगा। यह जानकारी उन अनिवासी आयातकों द्वारा दी जाएगी, जहाँ इनवॉइस या कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 10 लाख रुपए से अधिक है। बैंक को यह विवरण मिलने के पाँच कार्य दिवसों के भीतर इसे सिस्टम में दर्ज करना होगा।
इनपुट: IANS



