पंजाब: बकाया DA पर सरकार से नाराज़ कर्मचारी करेंगे 'महा-हड़ताल', भाजपा ने दिया समर्थन
पंजाब में सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी अपने रुके हुए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने बकाया जारी न होने के विरोध में…
पंजाब में सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी अपने रुके हुए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने बकाया जारी न होने के विरोध में 27 अगस्त को 'महा-हड़ताल' पर जाने का फैसला किया है, जिसमें वे सामूहिक आकस्मिक अवकाश (सीएल) लेंगे। इस आंदोलन को राज्य की भारतीय जनता पार्टी इकाई ने अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की है।
मंगलवार को एक बयान जारी कर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को यह कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकार उनका जायज बकाया नहीं दे रही है।
अदालती आदेशों की अनदेखी का आरोप
केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली 'आप' सरकार अदालत के बार-बार आदेशों के बावजूद अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के दावों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा, "ऐसा रवैया उन लोगों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दिखाता है, जिन्होंने दशकों तक राज्य की सेवा की है।"
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अब बहाने या प्रशासनिक कारणों का सहारा नहीं ले सकती, क्योंकि अदालत इस मामले पर पहले ही फैसला सुना चुकी है। ढिल्लों के अनुसार, हाई कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कर्मचारियों का रुका हुआ डीए जारी करने का आदेश दिया था। बाद में सरकार ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डबल बेंच में इसे चुनौती दी, लेकिन वहां भी पुराने फैसले को ही बरकरार रखा गया।
सरकार से तत्काल भुगतान की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अदालती आदेशों का पालन न करने के कारण अब सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और नौबत यहां तक नहीं आनी चाहिए थी।
ढिल्लों ने मांग की कि 'आप' सरकार बिना किसी देरी के अदालती आदेशों का पालन करे और कर्मचारियों का सारा बकाया डीए तुरंत जारी करे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी और पेंशनभोगी वित्तीय सुरक्षा, सम्मान और न्याय के हकदार हैं और सरकार को उन्हें उस चीज के लिए बार-बार संघर्ष करने पर मजबूर करना बंद कर देना चाहिए जो कानूनी तौर पर उनकी है।
इनपुट: IANS



