मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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केरल लोक सेवा आयोग की साख पर संकट, हाईकोर्ट ने प्लानिंग बोर्ड परीक्षा धांधली की जांच जारी रखने को कहा

केरल लोक सेवा आयोग (PSC), जिसे सरकारी नौकरियों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष संस्था माना जाता रहा है, इन दिनों अपनी विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला प्लानिंग बोर्ड की एक…

केरल लोक सेवा आयोग की साख पर संकट, हाईकोर्ट ने प्लानिंग बोर्ड परीक्षा धांधली की जांच जारी रखने को कहा
(फोटो: IANS)

केरल लोक सेवा आयोग (PSC), जिसे सरकारी नौकरियों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष संस्था माना जाता रहा है, इन दिनों अपनी विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला प्लानिंग बोर्ड की एक परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में जांच जारी रह सकती है।

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जस्टिस बदरुद्दीन की अदालत ने कहा कि केवल PSC द्वारा FIR रद्द करने के लिए याचिका दायर करने से जांच रोकने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने जांच पर कोई रोक (स्टे) नहीं लगाई थी और वह केवल याचिका पर विचार कर रहा है। PSC ने क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा है, जिसके बाद कोर्ट ने दो दिन बाद मामले पर फिर से सुनवाई करने का फैसला किया है।

जांच में क्या सामने आया?

इस पूरे मामले ने तूल तब पकड़ा जब क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच में पाया कि कुल 58 अंकों वाले 10 सवालों को जानबूझकर बिना जांचे छोड़ दिया गया था। इस खुलासे ने परीक्षा प्रक्रिया और रैंक लिस्ट तैयार करने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बाद में जब उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन हुआ, तो पूरी रैंकिंग ही बदल गई। शिकायतकर्ता श्याम कृष्णन संशोधित सूची में पहले स्थान पर आ गए, जिसके बाद PSC को नई रैंक लिस्ट के आधार पर एडवाइस मेमो जारी करना पड़ा।

विवाद का बढ़ता दायरा

जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को अब तक 150 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं, जो मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं। जांच टीम अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस धांधली में PSC के अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। इस विवाद ने आयोग के गठन पर भी ध्यान खींचा है, क्योंकि मौजूदा सभी 16 सदस्यों की नियुक्ति पिनाराई विजयन की पिछली सरकार ने की थी। यह भी कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति बाद में रद्द हुई, वह वामपंथी विचारधारा का समर्थक माना जाता है, जिससे मामले को राजनीतिक रंग भी मिल गया है।

लाखों उम्मीदवार सालों की मेहनत के बाद PSC की परीक्षाओं में बैठते हैं। उनके लिए यह आयोग योग्यता और निष्पक्षता का प्रतीक है। ऐसे में इस जांच के नतीजे न केवल प्रभावित उम्मीदवारों के लिए, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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