फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से कैदी की रिहाई: कर्नाटक जेल विभाग के DIG सोमशेखर गिरफ्तार
कर्नाटक में एक उम्रकैद के कैदी को कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश पर रिहा करने का एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु की परप्पना…
कर्नाटक में एक उम्रकैद के कैदी को कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश पर रिहा करने का एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा पुलिस ने इस सिलसिले में जेल विभाग के उत्तरी क्षेत्र के उप महानिरीक्षक (DIG) सोमशेखर को गिरफ्तार किया है। यह मामला 2018 का है, जब सोमशेखर परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल के अधीक्षक थे।
पुलिस ने बताया कि हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर नाम के कैदी को 13 नवंबर 2018 को रिहा कर दिया गया था। आरोप है कि उसकी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश जैसा दिखने वाला एक फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। पुलिस सोमशेखर से पूछताछ कर इस पूरी साजिश में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
जांच के दायरे में कई पहलू
इस मामले में पुलिस ने कैदी शंकर और सेकंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) श्रीकांत को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि फर्जी आदेश श्रीकांत ने ही तैयार किया था। जांच अधिकारी अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह जाली दस्तावेज कैसे बनाया गया और इसका इस्तेमाल किस तरह से किया गया।
पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी इसी तरह की अन्य घटनाओं में भी शामिल रहे हैं। इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि कहीं इसी तरह फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अन्य कैदियों को भी तो जेल से रिहा नहीं किया गया। फिलहाल, सोमशेखर और अन्य आरोपियों से पूछताछ जारी है।
पुलिसकर्मियों पर पहले भी उठे हैं सवाल
यह घटना कर्नाटक पुलिस विभाग में आपराधिक संलिप्तता को लेकर पहले भी उठ चुकी चिंताओं को उजागर करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पूर्व गृह मंत्री जी. परमेश्वर द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 88 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए केस दर्ज किए गए थे।
सिद्धारमैया ने पुलिसकर्मियों के ऐसे मामलों में शामिल होने को 'शर्मनाक और अक्षम्य' बताया था। उन्होंने एक एटीएम कैश वैन लूट का भी जिक्र किया था, जिसमें एक हेड कांस्टेबल को मास्टरमाइंड बताया गया था। इसी तरह, जी. परमेश्वर ने भी विधानसभा में आंकड़े पेश करते हुए पुलिस बल के भीतर जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया था।
इनपुट: IANS



