तमिलनाडु में BJP को मज़बूत करने के लिए केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति ने दी मंज़ूरी
केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद से मुक्त करने का अनुरोध किया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। समाचार…
केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद से मुक्त करने का अनुरोध किया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुरुगन ने 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठन को मज़बूत करने के लिए अपना पूरा समय देने की इच्छा जताई है।
राष्ट्रपति सचिवालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर यह इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 (2) के तहत राष्ट्रपति ने यह निर्णय लिया है। एल. मुरुगन अब तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ संसदीय मामलों के मंत्रालय में भी राज्य मंत्री (एमओएस) के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
ज़मीनी राजनीति में वापसी का लक्ष्य
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में, जिसे उन्होंने अपने 'एक्स' अकाउंट पर भी साझा किया, मुरुगन ने कहा कि वह ज़मीनी स्तर की राजनीति में लौटना चाहते हैं। उन्होंने लिखा, "अब मैं ज़मीनी स्तर पर लौटना चाहता हूं, अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देना चाहता हूं।"
उन्होंने कहा कि उनकी योजना तमिलनाडु के हर गांव और गली तक पहुंचने, लोगों से मिलने और पूरे राज्य में पार्टी की पहुंच का विस्तार करने की है। मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी के 'समावेशी विकास' के संदेश को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।
भावुक पत्र में निजी पृष्ठभूमि का ज़िक्र
केंद्र सरकार में अपनी सेवा को जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताते हुए मुरुगन ने अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वह दिहाड़ी मज़दूरों के बेटे के रूप में पले-बढ़े और उनके माता-पिता पशु चराने का काम भी करते थे। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता आज भी कोनूर गांव में सादा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि एबीवीपी और भाजपा में लगभग तीन दशकों के उनके राजनीतिक सफ़र का मार्गदर्शक सिद्धांत यही रहा है।
इनपुट: IANS



