त्रिपुरा में कृषि बाज़ारों का विस्तार: किसानों की आय बढ़ाने और अनाज भंडारण को मज़बूत करने की योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को एक वैश्विक अनाज भंडारण केंद्र बनाने के विजन के अनुरूप, त्रिपुरा सरकार राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। समाचार एजेंसी…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को एक वैश्विक अनाज भंडारण केंद्र बनाने के विजन के अनुरूप, त्रिपुरा सरकार राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 तक 58 और कृषि बाजार विकसित करने की विस्तृत योजना बनाई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए अपनी उपज बेचना आसान बनाना और उनकी आय में वृद्धि करना है।
यह जानकारी त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने सोमवार को दी। वह दक्षिण त्रिपुरा जिले के गजरिया बाजार में 4.51 करोड़ रुपये की लागत से बने दो मंजिला ग्रामीण बाजार का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार त्रिपुरा को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कृषि पर निर्भरता और विकास
मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा, "कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है और कृषि क्षेत्र के विकास के बिना देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा।" उन्होंने बताया कि त्रिपुरा की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है। उन्होंने कहा, "इसलिए, कृषि में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का अर्थ है राज्य को आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे ले जाना। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि अवसंरचना का विकास आवश्यक है।"
बाज़ारों का मौजूदा ढाँचा और भविष्य की योजना
वर्तमान में त्रिपुरा में कुल 554 कृषि बाज़ार हैं। इनमें 470 प्राथमिक या ग्रामीण बाज़ार हैं, जबकि 84 प्राथमिक थोक बाज़ार हैं, जिनमें से 21 कृषि उपज बाज़ार हैं। मंत्री के अनुसार, 2018-19 से 2026-27 के बीच 204 बाज़ारों में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 461.83 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें से 87 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और 117 पर काम जारी है।
विकास की गति की तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि 2013 से 2017 के पाँच वर्षों में केवल 71 बाज़ार विकास परियोजनाएँ शुरू की गई थीं, जिनके लिए लगभग 20.27 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था। नई योजनाओं से न केवल कृषि उपज की खरीद-बिक्री आसान होगी, बल्कि स्थानीय किसानों और व्यापारियों को भी बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।
इनपुट: IANS



