संयुक्त राष्ट्र का अगला प्रमुख लैटिन अमेरिका से हो: पनामा ने अमेरिका से मांगा समर्थन
संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस साल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में, पनामा ने अमेरिका से आग्रह किया है कि…
संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस साल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में, पनामा ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष पद के लिए लैटिन अमेरिकी या कैरेबियाई उम्मीदवार का समर्थन करे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मांग 'क्षेत्रीय रोटेशन' के सिद्धांत के आधार पर की गई है, जिसके तहत बारी-बारी से अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को नेतृत्व का अवसर मिलता है।
यह मुद्दा मंगलवार को पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई एक टेलीफोनिक बातचीत में उठाया गया। राष्ट्रपति मुलिनो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देश चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के चयन में इस अलिखित परंपरा का सम्मान किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस बार इस क्षेत्र के किसी व्यक्ति को यह ज़िम्मेदारी मिलनी चाहिए।
चुनाव पर सहमति और अमेरिकी रुख
दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि संयुक्त राष्ट्र के अगले प्रमुख के चुनाव के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बातचीत की पुष्टि तो की, लेकिन क्षेत्रीय रोटेशन के प्रस्ताव पर वॉशिंगटन के रुख का खुलासा नहीं किया। फिलहाल, किसी भी सरकार ने किसी विशेष उम्मीदवार के लिए समर्थन की घोषणा नहीं की है।
भूकंप सहायता पर भी हुई चर्चा
इस बातचीत में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के चुनाव के अलावा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रपति मुलिनो ने 9 अक्टूबर को आए भूकंप के बाद पनामा को दी गई मानवीय सहायता के लिए अमेरिका का धन्यवाद किया। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, मार्को रूबियो ने पनामा को पुनर्निर्माण कार्यों में निरंतर समर्थन देने की वॉशिंगटन की प्रतिबद्धता दोहराई।
एजेंसी ने बताया कि भूकंप के 24 घंटों के भीतर ही अमेरिकी सहायता प्रभावित समुदायों तक पहुंच गई थी, जिसमें भोजन, पानी, संचार उपकरण और बचाव दल शामिल थे। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में लोकतंत्र की स्थिति पर भी संक्षेप में बात की, लेकिन इसका कोई विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया गया।
इनपुट: IANS



