रविवार, 8 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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विश्व बैंक की रिपोर्ट: पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज का बोझ बढ़कर 135 अरब डॉलर हुआ, एक दशक में लगभग दोगुनी हुई देनदारी

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग दोगुना होकर 135.1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया…

विश्व बैंक की रिपोर्ट: पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज का बोझ बढ़कर 135 अरब डॉलर हुआ, एक दशक में लगभग दोगुनी हुई देनदारी
(फोटो: IANS)

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग दोगुना होकर 135.1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, यह आंकड़ा विश्व बैंक की 'इंटरनेशनल डेट रिपोर्ट 2026' में सामने आया है, जो दर्शाता है कि 2015 में यह कर्ज 68.7 अरब डॉलर था।

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यह रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ एक साल में ही पाकिस्तान की विदेशी देनदारी में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2024 में 129.9 अरब डॉलर थी। द खामा प्रेस न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस विशाल कर्ज राशि का अधिकांश हिस्सा सार्वजनिक और सरकार की गारंटी वाला है, जो कुल 107.08 अरब डॉलर है। इसके अलावा, निजी क्षेत्र का बिना गारंटी वाला कर्ज 17.58 अरब डॉलर और अल्पकालिक विदेशी कर्ज 10.45 अरब डॉलर है।

कर्जदाताओं का ब्योरा और ब्याज दरें

रिपोर्ट में कर्ज देने वाली संस्थाओं और देशों का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। बहुपक्षीय संस्थाएं 56.83 अरब डॉलर के साथ कर्ज का सबसे बड़ा स्रोत हैं, जबकि द्विपक्षीय कर्जदाताओं का बकाया 42.43 अरब डॉलर है। देशों की बात करें तो चीन लगभग 22.4 अरब डॉलर के कर्ज के साथ पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक का पाकिस्तान पर करीब 19.2 अरब डॉलर और एशियाई विकास बैंक का 16.83 अरब डॉलर का कर्ज है।

एक महत्वपूर्ण तथ्य जो रिपोर्ट उजागर करती है, वह है सरकारी और निजी कर्जदाताओं से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों में भारी अंतर। 2025 में जहां आधिकारिक कर्जदाताओं ने औसतन 3.6% ब्याज पर कर्ज दिया, वहीं निजी क्षेत्र से लिए गए कर्ज पर औसत ब्याज दर 8.6% रही। चुकौती अवधि में भी बड़ा अंतर था, जो क्रमशः 16 वर्ष और मात्र 3 वर्ष थी।

आर्थिक दबाव और राहत के प्रयास

कर्ज के इस बढ़ते बोझ का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। 2025 में देश का विदेशी कर्ज और सकल राष्ट्रीय आय (GNI) का अनुपात 34 प्रतिशत रहा। वहीं, निर्यात से होने वाली कमाई का 33 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में चला गया।

हालांकि, इस बीच पाकिस्तान को कुछ राहत भी मिली। इसी वर्ष चीन ने अपने करीब 2 अरब डॉलर के कर्ज की परिपक्वता अवधि बढ़ा दी, जिससे भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मिल गया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अपने कार्यक्रमों के तहत 2.3 अरब डॉलर की राशि जारी की। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान (MENAAP) क्षेत्र में बढ़ते कर्ज के जोखिमों पर भी चिंता जताई है।

इनपुट: IANS

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