शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एक दशक में पाकिस्तान का विदेशी क़र्ज़ दोगुना, चीन सबसे बड़े ऋणदाता के रूप में उभरा

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर विदेशी क़र्ज़ का बोझ पिछले एक दशक में लगभग दोगुना हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 में देश का कुल विदेशी क़र्ज़ 68.7 अरब डॉलर था, जो 2025…

एक दशक में पाकिस्तान का विदेशी क़र्ज़ दोगुना, चीन सबसे बड़े ऋणदाता के रूप में उभरा
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर विदेशी क़र्ज़ का बोझ पिछले एक दशक में लगभग दोगुना हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 में देश का कुल विदेशी क़र्ज़ 68.7 अरब डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर 135.1 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इस अवधि में चीन पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा क़र्ज़ देने वाले देश के रूप में सामने आया है।

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यह रिपोर्ट 'डॉन' के एक विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि दस वर्षों के भीतर पाकिस्तान के विदेशी ऋण में करीब 97 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस विशाल देनदारी में सार्वजनिक और सरकार द्वारा गारंटीकृत क़र्ज़ का हिस्सा 107.1 अरब डॉलर है। इसके अतिरिक्त, 17.6 अरब डॉलर निजी क्षेत्र का गैर-गारंटी वाला ऋण है, जबकि 10.5 अरब डॉलर की अल्पकालिक देनदारियाँ हैं।

क़र्ज़ का बँटवारा और प्रमुख ऋणदाता

सार्वजनिक क्षेत्र की कुल देनदारियों में से 56.8 अरब डॉलर बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से लिए गए हैं, जबकि 42.4 अरब डॉलर द्विपक्षीय ऋणदाताओं से प्राप्त हुए हैं। इन ऋणदाताओं में चीन 22.4 अरब डॉलर के बकाया के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद विश्व बैंक (19.2 अरब डॉलर) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) का स्थान है, जिनका क्रमशः 16.8 अरब डॉलर का क़र्ज़ पाकिस्तान पर है।

हालिया वित्तीय सहायता और वैश्विक परिदृश्य

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि 2025 के दौरान पाकिस्तान को कुछ वित्तीय राहत भी मिली। इसमें चीन द्वारा 2 अरब डॉलर के ऋण की परिपक्वता अवधि बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के सहायता कार्यक्रम के तहत 2.3 अरब डॉलर की राशि जारी करना शामिल है।

विश्लेषण यह भी दर्शाता है कि मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान (MENAP) क्षेत्र में, सकल राष्ट्रीय आय के अनुपात में विदेशी ऋण में सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी निम्न और मध्यम आय वाले देशों का विदेशी क़र्ज़ 2025 में 5.5 प्रतिशत बढ़कर 9.4 लाख करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।

इनपुट: IANS

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