बलूचिस्तान: क्वेटा में सैन्य कार्रवाई के बाद 300 परिवार बेघर, भोजन और पानी का गहराया संकट
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक सैन्य अभियान के बाद करीब 300 माशवानी जनजातीय परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्वेटा जिले…
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक सैन्य अभियान के बाद करीब 300 माशवानी जनजातीय परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्वेटा जिले के पंजपाई इलाके में हुई इस कार्रवाई के चलते विस्थापित हुए ये परिवार कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच भोजन, साफ पानी और सिर छिपाने की जगह जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यह संकट क्वेटा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित किली मोहम्मद खैल गांव में बुधवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और कुछ हथियारबंद लोगों के बीच हुई एक झड़प के बाद शुरू हुआ। इस झड़प में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के एक जवान की मौत हो गई थी। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के मुताबिक, एक अफगान शरणार्थी शिविर के पास भी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और निवासियों को घर खाली करने का आदेश दे दिया।
विस्थापन का दर्द और अनिश्चित भविष्य
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि सुरक्षा बलों की गोलाबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल से कई घरों को नुकसान पहुंचा है। विस्थापित लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। इन परिवारों का कहना है कि उनके पास बच्चों के साथ जाने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है और वे इस बात को लेकर भी अनिश्चित हैं कि वे अपने घरों में कब लौट पाएंगे।
राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों की निंदा
पख्तूनख्वा नेशनल अवामी पार्टी ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने एक बयान में कहा, "सुरक्षा के नाम पर लोगों को उनके घरों और पुश्तैनी इलाकों से बेदखल करना खुला अन्याय और दमन है।" पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह आतंकवाद से निपटने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाए, लेकिन निर्दोष नागरिकों को सामूहिक सजा न दे। साथ ही, विस्थापितों के लिए भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाओं और उनकी सुरक्षित व सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है।
यह घटना बलूचिस्तान में विस्थापन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा लगती है। पिछले महीने ही मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने आरोप लगाया था कि जेहरी, सरावान, मस्तुंग और मश्के समेत प्रांत के कई इलाकों से हजारों परिवारों को जबरन विस्थापित किया गया है, जिससे उनकी आजीविका और पुश्तैनी जमीनें छिन गई हैं। इसी तरह की शिकायतें ग्वादर जिले के शादी कौर इलाके के किसानों ने भी की हैं, जिन्हें सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण अपने खेतों तक पहुंचने से रोका जा रहा है, जिससे उनकी करोड़ों की फसलें खतरे में हैं।
इनपुट: IANS



