मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान एयरलाइंस में बड़ा घोटाला: प्रीमियम सीटों के नाम पर कर्मचारियों ने ही लूटे 50 लाख रुपये

पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन (PIA) में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ 20 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर कंपनी को 50 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR) से ज़्यादा का चूना लगा…

पाकिस्तान एयरलाइंस में बड़ा घोटाला: प्रीमियम सीटों के नाम पर कर्मचारियों ने ही लूटे 50 लाख रुपये
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन (PIA) में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ 20 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर कंपनी को 50 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR) से ज़्यादा का चूना लगा दिया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला लाहौर के अल्लामा इक़बाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रीमियम सीटों की बुकिंग में की गई हेराफेरी से जुड़ा है।

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यह पूरा मामला तब सामने आया जब लाहौर वित्त एवं ऑडिट समिति ने मई 2024 और 2025 के रिकॉर्ड की जाँच की। ऑडिट में पाया गया कि आरोपी कर्मचारी यात्रियों से प्रीमियम, एक्स्ट्रा-लेगरूम और बल्कहेड सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क तो वसूल रहे थे, लेकिन उस रकम को एयरलाइन के खाते में जमा नहीं कर रहे थे।

इस तरह दिया गया घोटाले को अंजाम

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी ग्राउंड स्टाफ सिस्टम में हेरफेर करके इन महंगी सीटों को 'स्टैंडर्ड' या 'सामान्य' सीट के तौर पर दर्ज कर देता था। इससे यात्रियों से वसूला गया अतिरिक्त पैसा सीधे उनकी जेब में चला जाता था। इस घटना ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन में आंतरिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

द न्यूज अखबार की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि यह धांधली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह की उड़ानों में की जा रही थी। हालांकि, अब तक आरोपी कर्मचारियों के वेतन से कटौती करके 5,060,269 पाकिस्तानी रुपये की पूरी राशि वसूल कर ली गई है और उसे पीआईए के खाते में वापस जमा करा दिया गया है।

घाटे और निजीकरण के बीच नया संकट

यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है जब पीआईए दशकों से चले आ रहे भारी नुकसान और निजीकरण की प्रक्रिया से गुज़र रही है। सरकार ने एयरलाइन को घाटे से उबारने के लिए उसके करीब 650 अरब रुपये के पुराने कर्ज़ को एक होल्डिंग कंपनी में डाल दिया है ताकि नए खरीदार को इस बोझ से बचाया जा सके।

लगभग 135 अरब रुपये के मूल्यांकन पर इसे आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम को बेच दिया गया है। लेकिन, इसमें से सरकार को नकद के रूप में सिर्फ़ 10 अरब रुपये के आसपास ही मिलेंगे, जबकि बाकी रकम एयरलाइन में इक्विटी के तौर पर निवेश की जाएगी। आलोचकों का कहना है कि यह निजीकरण एक समाधान कम और बोझ का हस्तांतरण ज़्यादा लगता है, क्योंकि कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण पैदा हुआ 650 अरब रुपये का कर्ज अब भी जनता पर ही है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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