शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: पांच वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध 2.37 लाख से अधिक अपराध दर्ज, रिपोर्ट में भयावह तस्वीर

पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की स्थिति पर एक मानवाधिकार समूह की रिपोर्ट ने चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित पीस…

पाकिस्तान: पांच वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध 2.37 लाख से अधिक अपराध दर्ज, रिपोर्ट में भयावह तस्वीर
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की स्थिति पर एक मानवाधिकार समूह की रिपोर्ट ने चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित पीस एंड जस्टिस नेटवर्क (पीजेएन) ने बताया है कि 2021 से 2025 के बीच देश में महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध 2,37,216 अपराध दर्ज किए गए। ये आंकड़े पीजेएन की 'राष्ट्रीय लिंग आधारित हिंसा (जीबीवी) अपराध रिपोर्ट 2021-2025' में सामने आए हैं, जो उनकी राष्ट्रीय न्याय विकास डेटा (डी4जेडी) पहल का हिस्सा है।

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रिपोर्ट के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि लिंग आधारित हिंसा के मामलों को समझने के लिए प्रांतीय आंकड़ों का गहराई से अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि ये आंकड़े कहीं पूरी तस्वीर दिखाते हैं तो कहीं भयावह सच्चाइयों को छिपाते भी हैं।

प्रांतों के अनुसार अपराधों का विश्लेषण

पंजाब: देश की कुल आबादी का 51.5 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले पंजाब प्रांत में लिंग आधारित हिंसा के सबसे अधिक मामले दर्ज हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 2,37,216 मामलों में से 1,95,787 मामले (लगभग 82.5%) अकेले पंजाब में दर्ज किए गए। इससे भी गंभीर बात यह है कि सामूहिक दुष्कर्म, हिरासत में यौन हिंसा और सगे-संबंधियों द्वारा यौन शोषण जैसे 90 प्रतिशत से अधिक मामले इसी प्रांत से थे।

सिंध: सिंध प्रांत में पांच वर्षों के दौरान 25,107 मामले दर्ज हुए, जो राष्ट्रीय आंकड़ों का 10.6 प्रतिशत है। यहां अपहरण और अगवा करने के मामले सबसे प्रमुख थे, जिनकी संख्या 19,289 (कुल प्रांतीय मामलों का लगभग 77%) थी।

खैबर पख्तूनख्वा: पाकिस्तान की 16.5% आबादी वाले खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में राष्ट्रीय स्तर पर केवल 4.3% यानी 10,210 मामले दर्ज हुए। हालांकि, कम संख्या के पीछे एक खौफनाक हकीकत छिपी है। शोध में पाया गया कि पुलिस में दर्ज घरेलू हिंसा के 2,334 मामलों में से 1,197 का अंत हत्या में हुआ।

कम रिपोर्टिंग और भौगोलिक बाधाएं

रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में 3,108 मामले दर्ज किए गए। वहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 1,572 और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में सिर्फ 161 मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े हिंसा की रिपोर्टिंग में संस्थागत और भौगोलिक चुनौतियों को दर्शाते हैं।

उदाहरण के लिए, पीओजीबी में पांच साल में दुष्कर्म के केवल सात मामले दर्ज होना, हिंसा की कमी को नहीं, बल्कि घनिष्ठ सामुदायिक संरचना और भौगोलिक अलगाव के कारण गंभीर रूप से कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है। इसी तरह, पीओके में दर्ज 1,572 मामलों में से 1,474 अपहरण से संबंधित थे, जबकि घरेलू शारीरिक हिंसा के मामले पुलिस रिकॉर्ड से लगभग गायब रहे।

इनपुट: IANS

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