ओवैसी का आरोप: तेलंगाना में 'फॉर्म-7' के ज़रिए मुस्लिम मतदाताओं को सूची से हटाने की साजिश
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना में मतदाता सूची से मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम हटाने के लिए एक "गहरी साजिश" रची जा रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने कहा कि…
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना में मतदाता सूची से मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम हटाने के लिए एक "गहरी साजिश" रची जा रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने कहा कि इसके लिए वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चल रहे विशेष अभियान के दौरान 'फॉर्म-7' का बड़े पैमाने पर और धोखाधड़ी से इस्तेमाल किया जा रहा है।
मंगलवार को हैदराबाद के सांसद ने इस मामले में तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) सी. सुदर्शन रेड्डी से शिकायत की। उन्होंने विशेष रूप से अपने संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गोशामहल विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख किया, जहां मुस्लिम मतदाताओं को जान-बूझकर निशाना बनाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
ओवैसी ने सीईओ को लिखे एक पत्र में ठोस उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर थुडुमु जनार्दन नामक एक व्यक्ति ने 'फॉर्म-7' के 122 आवेदन जमा किए। इन आवेदनों में उन मतदाताओं के नाम पहले से छपे हुए थे, जिन्हें सूची से हटाने की मांग की गई थी। सांसद ने कहा, "जांच करने पर हमें पता चला कि 'फॉर्म-7' भरने वाला व्यक्ति भाजपा का समर्थक है। इससे यह साफ हो जाता है कि 'फॉर्म-7' का इस्तेमाल खास तौर पर मुस्लिम वोटरों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।"
उन्होंने यह भी बताया कि जिन 122 नामों को हटाने की मांग की गई थी, वे सभी 2022 और 2026 की मतदाता सूची के साथ-साथ हाल ही में जारी ड्राफ्ट रोल में भी शामिल थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने सवाल किया, "ये सभी 122 वोटर मुसलमान हैं। 'फॉर्म-7' के लिए आवेदन कौन कर रहा है? मुसलमानों के प्रति यह नफरत क्यों है?"
चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग
ओवैसी ने बताया कि एक अन्य पोलिंग स्टेशन (नंबर 173) पर भी बिना आवेदक के नाम वाले लगभग 30 ऐसे ही फॉर्म मिले, जिन्हें बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अधिकारियों की सतर्कता की सराहना की, लेकिन आशंका जताई कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसा हो सकता है।
AIMIM प्रमुख ने मुख्य चुनाव अधिकारी से 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950' की धारा 31 के तहत गलत जानकारी देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से भी मांग की कि जो लोग गलत 'फॉर्म-7' आवेदनों के जरिए किसी एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
इस मुद्दे के अलावा, ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के चयन की प्रक्रिया को भी "गलत" बताया। उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से सरकार (कार्यपालिका) के पक्ष में है। इसे बदलने की जरूरत है।" उन्होंने मांग की कि पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश का पैनल सीईसी का चुनाव करता था।
इनपुट: IANS



