पीएम-दक्ष योजना का मूल्यांकन: क्या सरकार की कौशल प्रशिक्षण स्कीम हाशिए के वर्गों के लिए सफल रही?
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना के तहत पिछले चार वित्त वर्षों में 1.87 लाख से ज़्यादा लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। समाचार एजेंसी IANS की…
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना के तहत पिछले चार वित्त वर्षों में 1.87 लाख से ज़्यादा लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रशिक्षित उम्मीदवारों में से आधे से ज़्यादा, यानी 96,162 लोगों को नौकरियों के लिए प्लेसमेंट ऑफर भी मिले। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी एक फैक्टशीट में ये आँकड़े सामने आए हैं।
यह योजना वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य हाशिए पर मौजूद समुदायों के युवाओं को रोज़गार योग्य बनाना था। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS), विमुक्त जनजातियों और सफ़ाई कर्मचारियों (कचरा बीनने वालों सहित) को लक्षित किया गया।
योजना का असर और मूल्यांकन
मंत्रालय की फैक्टशीट में योजना के मूल्यांकन अध्ययन का भी ज़िक्र है, जिसके अनुसार यह अपने उद्देश्यों में काफी सफल रही है। अध्ययन में शामिल 90 प्रतिशत से ज़्यादा लाभार्थियों ने माना कि प्रशिक्षण उनके करियर के लक्ष्यों और स्थानीय बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप था। इसके अलावा, प्रशिक्षण ने लाभार्थियों के आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान पर भी सकारात्मक असर डाला, जो विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों में देखा गया।
बजट और कार्यान्वयन की प्रक्रिया
वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान पीएम-दक्ष योजना के लिए कुल 276.47 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था, जबकि इस पर अब तक 309.5 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के तहत तीन निगमों के माध्यम से लागू किया गया: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC), और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)।
इन निगमों द्वारा सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण की लागत का भुगतान किया जाता था। संस्थानों के लिए यह अनिवार्य था कि वे कम से कम 70% प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोज़गार दिलाएं, अन्यथा प्रशिक्षण लागत की 30% राशि ज़ब्त कर ली जाती थी।
अब पीएमकेवीवाई में हुआ विलय
सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष योजना को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) में विलय करने का फैसला किया है। यह निर्णय दोहराव से बचने के लिए लिया गया, क्योंकि दोनों योजनाओं के तहत दिए जाने वाले कौशल प्रशिक्षण के जॉब रोल 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' पोर्टल से ही लिए जाते थे।
इनपुट: IANS



