BJP के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर विपक्ष का तंज: 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे'
दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च के आयोजन की घोषणा पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष के कई नेताओं ने इस आयोजन को लेकर भाजपा की आलोचना की…
दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च के आयोजन की घोषणा पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष के कई नेताओं ने इस आयोजन को लेकर भाजपा की आलोचना की है और सत्ताधारी दल पर ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि असल में लोकतंत्र को भाजपा से ही बचाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया, "जिस तरह से वह (भाजपा) हर संस्था को कमजोर कर रही है, चाहे वह चुनाव आयोग हो, हमारे वित्तीय संस्थान हों या जांच एजेंसियां, वह चिंताजनक है।" उन्होंने भाजपा पर इन संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक दलों को तोड़ने और कमजोर करने के लिए करने का आरोप लगाते हुए इस मार्च को 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' जैसा बताया।
रैली की अनुमति पर भेदभाव का आरोप
कई नेताओं ने राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति देने में प्रशासन द्वारा कथित तौर पर भेदभाव किए जाने का मुद्दा उठाया। सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हर दल को मार्च और रैली करने का अधिकार है, लेकिन यह मायने रखता है कि सरकार और प्रशासन उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष कार्यक्रम करता है तो कई पाबंदियां लगा दी जाती हैं, जबकि सत्ताधारी दल के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाती हैं।
इसी तरह, एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने सवाल किया कि भाजपा को अपने कार्यक्रम के लिए आसानी से अनुमति कैसे मिल जाती है, जबकि छात्र आंदोलनों या अन्य समूहों को इसकी इजाजत नहीं मिलती। उन्होंने भाजपा पर ही अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सवाल पूछना जरूरी है कि जो लोग लोकतंत्र को कथित तौर पर कमजोर कर रहे हैं, उन्हें रैली करने की अनुमति क्यों दी जा रही है।
'खुद हंसी का पात्र बनेगी भाजपा'
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भाजपा के प्रस्तावित मार्च पर तंज कसते हुए कहा कि 'लोकतंत्र बचाने' के नाम पर ऐसा कार्यक्रम करके पार्टी खुद को लोगों के बीच "हंसी का पात्र" बना सकती है। दीक्षित ने मार्च के लिए लाल किले के चुनाव पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "लाल किला मुगल सत्ता का प्रतीक है... जो स्मारक उनके (भाजपा के) इतिहास में मौजूद ही नहीं है, वहां से वे पदयात्रा कैसे शुरू कर सकते हैं?" उनका इशारा मुगल इतिहास के प्रति भाजपा के दृष्टिकोण की ओर था।
इनपुट: IANS



