नितेश राणे के 'हिंदू दुकानों से खरीदें' बयान पर विवाद, विपक्ष ने की इस्तीफे की मांग
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के एक बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने हिंदुओं से त्योहारों के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदने की अपील की थी। समाचार एजेंसी IANS…
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के एक बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने हिंदुओं से त्योहारों के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदने की अपील की थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राणे की इस टिप्पणी की विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे समाज में नफरत फैलाने की कोशिश बताया है।
एक सभा को संबोधित करते हुए राणे ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि नासिक कुंभ मेले में मुस्लिम विक्रेताओं को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों से खरीदे गए सामान का पैसा चरमपंथ को बढ़ावा देने में इस्तेमाल किया जा सकता है। राणे ने यह भी कहा कि हिंदुओं को सिर्फ दूसरे हिंदुओं से ही बातचीत करनी चाहिए।
विपक्षी दलों का तीखा हमला
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा, “वे सिर्फ देश में दंगे और सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम करते हैं।” उन्होंने राणे को एक 'अवसरवादी' नेता बताते हुए कहा कि उनके पास कोई मौलिक विचार नहीं हैं। वीरेंद्र ने यह भी मांग की कि राणे अपना बयान वापस लें और जनता से माफी मांगें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख सभी ने देश की आजादी के लिए मिलकर संघर्ष किया था। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, न कि हिंदू राष्ट्र।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मंत्री विजय वडेट्टीवार ने भी राणे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मंत्री होने के नाते उन्हें संविधान की जानकारी होनी चाहिए। उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्होंने शपथ ली है। वे सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए इस पद पर हैं। यह आरएसएस और भाजपा की साजिश है।”
'लोगों पर असर नहीं होगा'
कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने कहा कि ऐसे फैसले लेने में राणे की कोई भूमिका नहीं है और इसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने कहा, “उनके जैसे लोग सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी पैदा कर सकते हैं।” दलवाई ने इस बात की संभावना को खारिज कर दिया कि इस तरह के बयानों का लोगों की खरीदारी पर कोई असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “लोग इसका पालन नहीं करेंगे। केवल गुणवत्तापूर्ण और किफायती वस्तुएं ही बिकेंगी। लोग यह नहीं देखेंगे कि दुकानदार हिंदू है या मुसलमान।”
इनपुट: IANS



