सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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वैश्विक तेल भंडार खतरनाक स्तर पर, सऊदी अरामको के CEO ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनी

दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर आ गए हैं। सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी है…

वैश्विक तेल भंडार खतरनाक स्तर पर, सऊदी अरामको के CEO ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनी
(फोटो: IANS)

दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर आ गए हैं। सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं हुई, तो ऊर्जा बाजारों को आपूर्ति के गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि तेल भंडार आमतौर पर बाजार को किसी भी अचानक आए संकट से बचाते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में ये इतने कम हो गए हैं कि कोई भी नई समस्या गंभीर असर डाल सकती है।

क्यों चिंताजनक है मौजूदा स्थिति?

अमीन नासिर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीज़ल भंडार जारी करने की योजना बनाई है। नासिर ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कदमों से भले ही कुछ समय के लिए राहत मिल जाए, लेकिन यह बाजार में मांग और आपूर्ति के बुनियादी असंतुलन को ठीक नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन का परिवहन पूरी तरह सामान्य होकर बाजार का भरोसा बहाल नहीं हो जाता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन के बाजारों पर दबाव बना रहेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस साल अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

अरामको प्रमुख ने आगाह किया कि जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने के बाद भी वैश्विक तेल भंडारों को वापस सामान्य स्तर पर लाने में लगभग दो साल लग सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संकट सिर्फ कुछ समय का नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक बना रह सकता है।

आपूर्ति बहाल करने के प्रयास

हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देश निर्यात सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तर के करीब पहुंच रही है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने परिवहन जारी रखने के लिए अपने टैंकर बेड़े का इस्तेमाल बढ़ाया है। सऊदी अरामको ने भी रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और प्रभावित ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को करीब 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है।

इन प्रयासों के बावजूद, फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

इनपुट: IANS

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