ओडिशा: 8 साल के लंबे इंतजार के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फिर होंगे छात्र संघ चुनाव
ओडिशा के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर छात्र संघ चुनावों की रौनक लौटने वाली है। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्र संघ चुनावों की तारीख का ऐलान…
ओडिशा के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर छात्र संघ चुनावों की रौनक लौटने वाली है। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्र संघ चुनावों की तारीख का ऐलान कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन वोटों की गिनती के बाद नतीजे भी घोषित कर दिए जाएँगे।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, राज्य में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव 2017 में हुए थे। इसके बाद 2018 में परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं और चक्रवात 'तितली' के कारण इन्हें रद्द कर दिया गया था। बाद में कोविड-19 महामारी और फिर सरकार बदलने की प्रक्रिया के चलते चुनाव लगातार टलते रहे।
चुनाव का पूरा कार्यक्रम
विभाग ने चुनाव के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत, सभी कॉलेज 7 अक्टूबर को चुनाव की अधिसूचना जारी करेंगे। नामांकन पत्र 9 अक्टूबर को दाखिल और जांचे जाएँगे। उम्मीदवारों के लिए नाम वापस लेने और अंतिम सूची जारी करने की तारीख 10 अक्टूबर तय की गई है। मतदान से एक दिन पहले, 14 अक्टूबर को, 'व्हाई आई स्टैंड फॉर' बैठक का आयोजन होगा, जहाँ उम्मीदवार अपनी बात रखेंगे। चुनाव प्रक्रिया 16 अक्टूबर को नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह के साथ संपन्न होगी।
उम्मीदवारों के लिए सख्त नियम
चुनावों को निष्पक्ष और राजनीति से दूर रखने के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा अधिकतम 5,000 रुपए रखी गई है और वे किसी भी राजनीतिक दल से आर्थिक मदद नहीं ले सकते।
पात्रता की शर्तें:
- चुनाव लड़ने के लिए छात्र का नियमित विद्यार्थी होना और कक्षा में कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य है।
- स्नातक (UG) छात्रों की आयु 17 से 22 वर्ष और स्नातकोत्तर (PG) के लिए 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- उम्मीदवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और न ही कोई शैक्षणिक बैकलॉग।
आचार संहिता और अन्य निर्देश
आचार संहिता के तहत प्रिंटेड पोस्टर, जाति या समुदाय के नाम पर वोट मांगने और मतदाताओं को डराने-धमकाने पर पूरी तरह से रोक है। सोशल मीडिया पर झूठी या एआई-जनित फर्जी सामग्री का इस्तेमाल करने पर भी सख्त मनाही है। दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और संस्थान अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकता है।
इनपुट: IANS



